हजारीबाग एसबीआई मुख्य शाखा में 'सीनियर सिटीजन फैसिलिटिजेशन डेस्क' की स्थापना: बुजुर्गों को मिलेगी लंबी लाइनों से मुक्ति
"प्रधान जिला न्यायाधीश ध्रुव चंद्र मिश्रा के दिशानिर्देश पर प्राधिकार ने शुरू किया 30 दिवसीय विशेष शिविर; सचिव डॉ रवि प्रकाश तिवारी ने बताया सशक्तिकरण और गरिमा का माध्यम"— विशेष रिपोर्ट
विधिक एवं प्रशासनिक ब्यूरो, हजारीबाग
- रिपोर्टर: जिला संवाददाता (News Prahari)
- समाचार स्रोत (Source): जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) हजारीबाग प्रेस विज्ञप्ति (दिनांक: 11 जून 2026)
हजारीबाग:
झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) के निर्देशानुसार हजारीबाग में बुजुर्ग नागरिकों की प्रशासनिक व बैंकिंग सुविधाओं को सुगम बनाने के लिए एक बड़ी विधिक पहल की गई है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) हजारीबाग के बैनर तले संचालित 90 दिवसीय कानूनी जागरूकता आउटरीच कार्यक्रम के तहत, 'जागृति स्कीम 2025' के अंतर्गत जून माह में 30 दिवसीय 'सीनियर सिटीजन फैसिलिटिजेशन डेस्क' (वरिष्ठ नागरिक सुविधा केंद्र) की स्थापना की गई है। यह विशेष डेस्क हजारीबाग शहर के हृदय स्थल में स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की मुख्य शाखा में सुचारू रूप से कार्य कर रही है।
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| "हजारीबाग के बुजुर्गों के लिए राहत की बड़ी खबर है! जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने स्टेट बैंक में सीनियर सिटीजन फैसिलिटिजेशन डेस्क शुरू कर दिया है!" |
प्रधान जिला न्यायाधीश और सचिव के नेतृत्व में बुजुर्गों को संबल
इस पूरे जनकल्याणकारी कार्यक्रम का आयोजन प्रधान जिला न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार हजारीबाग, ध्रुव चंद्र मिश्रा के कुशल दिशानिर्देश में किया जा रहा है। शिविर के पहले चरण में अधिकार मित्र विकाश कुमार पांडेय ने बैंक पहुंचे दर्जनों वरिष्ठ नागरिकों से सीधे मुलाकात की। उन्होंने बुजुर्गों की रोजमर्रा की समस्याओं और बैंकिंग दिक्कतों को जाना तथा उनके त्वरित विधिक समाधान के लिए महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए। उन्होंने बुजुर्गों को भरोसा दिलाया कि उनकी हर विधिक और व्यावहारिक समस्या के समाधान के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार चौबीसों घंटे तत्पर है।
सरकारी कार्यालयों और अस्पतालों में बिना परेशानी के होगा काम
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार हजारीबाग के सचिव, डॉ रवि प्रकाश तिवारी ने बताया कि यह 30 दिनों तक चलने वाला एक विशेष 'वरिष्ठ नागरिक सशक्तिकरण और गरिमा कार्यक्रम' है। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य बुजुर्ग नागरिकों को सरकारी कार्यालयों, बैंकों और अस्पतालों में हर संभव सहायता प्रदान करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस डेस्क के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि समाज के बुजुर्गों को किसी भी कार्यालय में बिना किसी परेशानी या लंबी लाइनों में खड़े हुए उनके काम को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करवाया जा सके।
📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड (वरिष्ठ नागरिक विधिक अधिकार / Senior Citizens Legal Framework)
📌 जानिए क्या हैं वरिष्ठ नागरिकों के विधिक अधिकार और भरण-पोषण के नियम?
- माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम, 2007: इस केंद्रीय कानून के तहत यदि बच्चे या रिश्तेदार किसी वरिष्ठ नागरिक की देखरेख नहीं करते हैं, तो पीड़ित बुजुर्ग जिला अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) के समक्ष भरण-पोषण न्यायाधिकरण (Tribunal) में आवेदन कर सकते हैं। न्यायाधिकरण बच्चों को प्रति माह अधिकतम 10,000 रुपये तक गुजारा भत्ता देने का आदेश जारी कर सकता है।
- त्वरित विधिक सहायता (RTI & Legal Aid): विधिक सेवा प्राधिकार अधिनियम, 1987 के तहत देश के हर वरिष्ठ नागरिक को जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) के माध्यम से किसी भी अदालती या विधिक कार्य के लिए पूरी तरह 'मुफ्त वकील' और कानूनी परामर्श पाने का विधिक अधिकार प्राप्त है।
🔍 संपादकीय विश्लेषण: बुजुर्गों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा समाज का पहला कर्तव्य (Editorial)
बैंकों और दफ्तरों में बुजुर्गों की उपेक्षा रोकने के लिए डीएलएसए (DLSA) की यह पहल अनुकरणीय
अक्सर देखा जाता है कि पेंशन, बैंकिंग या इलाज के काम से आने वाले बुजुर्गों को सरकारी और निजी संस्थानों में घंटों इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में हजारीबाग एसबीआई मुख्य शाखा में 'सीनियर सिटीजन फैसिलिटिजेशन डेस्क' की स्थापना जिला प्रशासन और न्यायपालिका की संवेदनशीलता को दर्शाती है। प्रधान जिला न्यायाधीश ध्रुव चंद्र मिश्रा और सचिव डॉ रवि प्रकाश तिवारी का यह प्रयास प्रशंसनीय है क्योंकि यह सिर्फ एक हेल्पडेस्क नहीं, बल्कि बुजुर्गों को समाज में गरिमापूर्ण जीवन जीने का हक देता है। 'न्यूज़ प्रहरी' का मानना है कि इस तरह के सुविधा केंद्र केवल जून महीने के लिए नहीं, बल्कि हर बड़े सरकारी अस्पताल और समाहरणालय (Collectorate) में स्थायी रूप से स्थापित होने चाहिए।
















