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Editor: Naresh Prasad Soni
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हजारीबाग एसबीआई मुख्य शाखा में 'सीनियर सिटीजन फैसिलिटिजेशन डेस्क' की स्थापना: बुजुर्गों को मिलेगी लंबी लाइनों से मुक्ति

हजारीबाग एसबीआई मुख्य शाखा में 'सीनियर सिटीजन फैसिलिटिजेशन डेस्क' की स्थापना: बुजुर्गों को मिलेगी लंबी लाइनों से मुक्ति

"प्रधान जिला न्यायाधीश ध्रुव चंद्र मिश्रा के दिशानिर्देश पर प्राधिकार ने शुरू किया 30 दिवसीय विशेष शिविर; सचिव डॉ रवि प्रकाश तिवारी ने बताया सशक्तिकरण और गरिमा का माध्यम"— विशेष रिपोर्ट

विधिक एवं प्रशासनिक ब्यूरो, हजारीबाग

  • रिपोर्टर: जिला संवाददाता (News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) हजारीबाग प्रेस विज्ञप्ति (दिनांक: 11 जून 2026)

हजारीबाग:

झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) के निर्देशानुसार हजारीबाग में बुजुर्ग नागरिकों की प्रशासनिक व बैंकिंग सुविधाओं को सुगम बनाने के लिए एक बड़ी विधिक पहल की गई है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) हजारीबाग के बैनर तले संचालित 90 दिवसीय कानूनी जागरूकता आउटरीच कार्यक्रम के तहत, 'जागृति स्कीम 2025' के अंतर्गत जून माह में 30 दिवसीय 'सीनियर सिटीजन फैसिलिटिजेशन डेस्क' (वरिष्ठ नागरिक सुविधा केंद्र) की स्थापना की गई है। यह विशेष डेस्क हजारीबाग शहर के हृदय स्थल में स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की मुख्य शाखा में सुचारू रूप से कार्य कर रही है।

"हजारीबाग के बुजुर्गों के लिए राहत की बड़ी खबर है! जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने स्टेट बैंक में सीनियर सिटीजन फैसिलिटिजेशन डेस्क शुरू कर दिया है!"

प्रधान जिला न्यायाधीश और सचिव के नेतृत्व में बुजुर्गों को संबल

​इस पूरे जनकल्याणकारी कार्यक्रम का आयोजन प्रधान जिला न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार हजारीबाग, ध्रुव चंद्र मिश्रा के कुशल दिशानिर्देश में किया जा रहा है। शिविर के पहले चरण में अधिकार मित्र विकाश कुमार पांडेय ने बैंक पहुंचे दर्जनों वरिष्ठ नागरिकों से सीधे मुलाकात की। उन्होंने बुजुर्गों की रोजमर्रा की समस्याओं और बैंकिंग दिक्कतों को जाना तथा उनके त्वरित विधिक समाधान के लिए महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए। उन्होंने बुजुर्गों को भरोसा दिलाया कि उनकी हर विधिक और व्यावहारिक समस्या के समाधान के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार चौबीसों घंटे तत्पर है।

सरकारी कार्यालयों और अस्पतालों में बिना परेशानी के होगा काम

​प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार हजारीबाग के सचिव, डॉ रवि प्रकाश तिवारी ने बताया कि यह 30 दिनों तक चलने वाला एक विशेष 'वरिष्ठ नागरिक सशक्तिकरण और गरिमा कार्यक्रम' है। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य बुजुर्ग नागरिकों को सरकारी कार्यालयों, बैंकों और अस्पतालों में हर संभव सहायता प्रदान करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस डेस्क के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि समाज के बुजुर्गों को किसी भी कार्यालय में बिना किसी परेशानी या लंबी लाइनों में खड़े हुए उनके काम को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करवाया जा सके।

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड (वरिष्ठ नागरिक विधिक अधिकार / Senior Citizens Legal Framework)

​📌 जानिए क्या हैं वरिष्ठ नागरिकों के विधिक अधिकार और भरण-पोषण के नियम?

  • माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम, 2007: इस केंद्रीय कानून के तहत यदि बच्चे या रिश्तेदार किसी वरिष्ठ नागरिक की देखरेख नहीं करते हैं, तो पीड़ित बुजुर्ग जिला अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) के समक्ष भरण-पोषण न्यायाधिकरण (Tribunal) में आवेदन कर सकते हैं। न्यायाधिकरण बच्चों को प्रति माह अधिकतम 10,000 रुपये तक गुजारा भत्ता देने का आदेश जारी कर सकता है।
  • त्वरित विधिक सहायता (RTI & Legal Aid): विधिक सेवा प्राधिकार अधिनियम, 1987 के तहत देश के हर वरिष्ठ नागरिक को जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) के माध्यम से किसी भी अदालती या विधिक कार्य के लिए पूरी तरह 'मुफ्त वकील' और कानूनी परामर्श पाने का विधिक अधिकार प्राप्त है।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: बुजुर्गों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा समाज का पहला कर्तव्य (Editorial)

बैंकों और दफ्तरों में बुजुर्गों की उपेक्षा रोकने के लिए डीएलएसए (DLSA) की यह पहल अनुकरणीय

अक्सर देखा जाता है कि पेंशन, बैंकिंग या इलाज के काम से आने वाले बुजुर्गों को सरकारी और निजी संस्थानों में घंटों इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में हजारीबाग एसबीआई मुख्य शाखा में 'सीनियर सिटीजन फैसिलिटिजेशन डेस्क' की स्थापना जिला प्रशासन और न्यायपालिका की संवेदनशीलता को दर्शाती है। प्रधान जिला न्यायाधीश ध्रुव चंद्र मिश्रा और सचिव डॉ रवि प्रकाश तिवारी का यह प्रयास प्रशंसनीय है क्योंकि यह सिर्फ एक हेल्पडेस्क नहीं, बल्कि बुजुर्गों को समाज में गरिमापूर्ण जीवन जीने का हक देता है। 'न्यूज़ प्रहरी' का मानना है कि इस तरह के सुविधा केंद्र केवल जून महीने के लिए नहीं, बल्कि हर बड़े सरकारी अस्पताल और समाहरणालय (Collectorate) में स्थायी रूप से स्थापित होने चाहिए।

और पढ़ें : हजारीबाग एसबीआई मुख्य शाखा में वरिष्ठ नागरिकों के लिए विधिक जागरूकता शिविर आयोजित: मुफ्त कानूनी सहायता की मिली विस्तृत जानकारी

हजारीबाग में कानून की अलख जगा रहा DLSA: 16 प्रखंडों में 90 दिनों का महाभियान शुरू; प्रधान जिला न्यायाधीश और सचिव के नेतृत्व में घर-घर पहुंच रहे 'अधिकार मित्र'



झारखंड में प्रशासनिक फेरबदल: राज्य सूचना आयोग में चार नए सूचना आयुक्तों की हुई नियुक्ति, राज्यपाल ने दी मंजूरी

 

झारखंड में प्रशासनिक फेरबदल: राज्य सूचना आयोग में चार नए सूचना आयुक्तों की हुई नियुक्ति, राज्यपाल ने दी मंजूरी

"कार्मिक विभाग ने जारी की आधिकारिक अधिसूचना; अनुज कुमार सिन्हा, तनुज खत्री, अमूल्य नीरज खलखो और शिवपूजन पाठक संभालेंगे नई जिम्मेदारी"— विशेष रिपोर्ट

राज्य प्रशासनिक ब्यूरो, रांची

  • रिपोर्टर: विशेष संवाददाता (News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग, झारखंड सरकार (अधिसूचना संख्या: 3761, दिनांक: 10 जून 2026)

रांची:

झारखंड सरकार ने राज्य सूचना आयोग को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, झारखंड के माननीय राज्यपाल ने सूचना के अधिकार अधिनियम (RTI Act), 2005 की धारा-15 (3) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सूचना आयोग में रिक्त पड़े पदों पर चार नए सूचना आयुक्तों की नियुक्ति कर दी है। सरकार के इस फैसले से राज्य में सूचना के अधिकार के तहत लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है।

झारखंड सरकार का बड़ा आदेश! राज्य सूचना आयोग में 4 नए सूचना आयुक्त नियुक्त

इन चार प्रमुख व्यक्तियों को मिली सूचना आयुक्त की कमान

​जारी सरकारी पत्र "231322.jpg" के मुताबिक, झारखंड राज्य सूचना आयोग के सूचना आयुक्त के पद पर निम्नलिखित व्यक्तियों को नियुक्त किया गया है:

  1. अनुज कुमार सिन्हा: (पिता: सुरेंद्र प्रसाद सिन्हा), निवासी: दीपाटोली, सदर, रांची।
  2. तनुज खत्री: (पिता: देवराज खत्री), निवासी: रातू रोड, सुखदेवनगर, रांची।
  3. अमूल्य नीरज खलखो: (पिता: स्वर्गीय जफरीन खलखो), निवासी: पुराना लोवाडीह, नामकुम, रांची।
  4. शिवपूजन पाठक: (पिता: स्वर्गीय नरसिंह पाठक), निवासी: अपर बाजार, कोतवाली, रांची।

शपथ ग्रहण की तिथि से प्रभावी होगा कार्यकाल, ये हैं नियम

​अधिसूचना के पैरा संख्या 2 के अनुसार, सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा-16 (3) के आलोक में इन सभी नवनियुक्त सूचना आयुक्तों की नियुक्ति उनके शपथ ग्रहण की तिथि से प्रभावी मानी जाएगी। इनका कार्यकाल पद ग्रहण करने से लेकर अगले 03 (तीन) वर्ष की अवधि अथवा 65 (पैंसठ) वर्ष की आयु पूरी होने तक (जो भी पहले हो) तक रहेगा।

Adhikarik Jari Patra.

​यह आदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार के हस्ताक्षर से जारी किया गया है और इसकी प्रतिलिपि विभागीय नोडल पदाधिकारी सहित ई-गजट को झारखंड राजपत्र के असाधारण अंक में प्रकाशन के लिए भेज दी गई है।

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड (विधिक एवं प्रशासनिक ज्ञान / Legal & RTI Framework)

​📌 जानिए क्या होता है राज्य सूचना आयोग और सूचना आयुक्त का दायित्व?

  • अपील का सर्वोच्च मंच: राज्य सूचना आयोग (State Information Commission) राज्य स्तर पर एक स्वतंत्र विधिक संस्था है। जब कोई नागरिक किसी सरकारी विभाग से सूचना मांगता है और लोक सूचना अधिकारी (PIO) या प्रथम अपीलीय अधिकारी समय पर या सही जानकारी नहीं देते, तब नागरिक इस आयोग में द्वितीय अपील दर्ज कराता है।
  • जुर्माने का अधिकार: सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत यदि कोई अधिकारी जानबूझकर सूचना छुपाता है या गलत तथ्य देता है, तो सूचना आयुक्तों को उस अधिकारी पर प्रतिदिन 250 रुपये से लेकर अधिकतम 25,000 रुपये तक का आर्थिक दंड (Penalties) लगाने का विधिक अधिकार प्राप्त है।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: सूचना आयोग में नियुक्तियों से पारदर्शी शासन को मिलेगी ताकत (Editorial)

लंबे समय से खाली पदों के भरने से आम जनता को मिलेगी राहत, रुकेगा भ्रष्टाचार

झारखंड राज्य सूचना आयोग में लंबे समय से आयुक्तों के पद रिक्त होने के कारण हजारों आरटीआई (RTI) अपीलें लंबित पड़ी थीं। सूचना आयुक्तों की अनुपस्थिति का सीधा नुकसान उन आम नागरिकों और आरटीआई कार्यकर्ताओं को हो रहा था जो सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करना चाहते हैं। 'न्यूज़ प्रहरी' सरकार के इस फैसले का स्वागत करता है। इन चार नई नियुक्तियों से न केवल प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता आएगी, बल्कि आम जनता का लोकतांत्रिक संस्थाओं पर विश्वास और मजबूत होगा। अब आवश्यकता इस बात की है कि नवनियुक्त अधिकारी बिना किसी राजनीतिक दबाव के निष्पक्षता से आम जनमानस के सूचना के अधिकारों की रक्षा करें।

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इज़राइल के पीएम नेतन्याहू ने पीएम मोदी को दी ऐतिहासिक जीत की बधाई, कहा- "आपके नेतृत्व में भारत ने बदली अपनी तस्वीर"

 

इज़राइल के पीएम नेतन्याहू ने पीएम मोदी को दी ऐतिहासिक जीत की बधाई, कहा- "आपके नेतृत्व में भारत ने बदली अपनी तस्वीर"

नई दिल्ली / यरूशलेम:

भारत में आम चुनावों के नतीजों के बाद वैश्विक स्तर पर बधाई संदेशों का सिलसिला जारी है।


इसी कड़ी में इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके लगातार तीसरी बार कार्यकाल संभालने और भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर एक विशेष वीडियो संदेश जारी कर बधाई दी है।


​नेतन्याहू ने पीएम मोदी को अपना 'प्रिय मित्र' बताते हुए भारत की आर्थिक प्रगति और दोनों देशों के मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों की जमकर सराहना की।

​नेतन्याहू ने की भारत की आर्थिक प्रगति की तारीफ

​अपने वीडियो संदेश में इज़राइली प्रधानमंत्री ने कहा कि पीएम मोदी के कुशल नेतृत्व ने भारत को पूरी तरह से बदल दिया है। उन्होंने भारत के विकास मॉडल को रेखांकित करते हुए दो महत्वपूर्ण बातें कहीं:

  • तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था: 1.4 बिलियन (140 करोड़) से अधिक आबादी वाले इस देश को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनाने का श्रेय पीएम मोदी के नेतृत्व को जाता है।
  • गरीबी उन्मूलन में बड़ी कामयाबी: उन्होंने इस बात की विशेष सराहना की कि मोदी सरकार के कार्यकाल में लगभग 25 करोड़ (250 मिलियन) भारतीयों को गरीबी रेखा से बाहर निकाला गया है, जो कि अपने आप में एक सराहनीय मिशन है।

​"भारत और इज़राइल के रिश्ते अब तक के सबसे मजबूत दौर में"

​दोनों देशों के बीच रणनीतिक और कूटनीतिक रिश्तों पर बात करते हुए बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा, "हमारे बीच की दोस्ती और हमारे दो महान देशों के संबंध आज इतिहास के सबसे मजबूत पड़ाव पर हैं।" उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में दोनों देश मिलकर विकास और सुरक्षा के कई अन्य क्षेत्रों में एक साथ काम करना जारी रखेंगे।

​'मज़ल तोव' कहकर दीं शुभकामनाएं

​अपने संदेश के अंत में इज़राइली पीएम ने पारंपरिक हिब्रू शब्द "मज़ल तोव" (Mazel Tov) कहकर पीएम मोदी को बधाई दी, जिसका अर्थ 'सौभाग्य' या 'बधाई' होता है। उन्होंने कहा, "मेरे अच्छे मित्र, आपको और आपके नेतृत्व में आगे बढ़ रहे पूरे भारत को ढेर सारी शुभकामनाएं।"

कटकमदाग हादसे की पीड़िता के परिवार की मदद को आगे आया प्रशासन प्रकोष्ठ: राशन सामग्री और वस्त्रों का किया गया वितरण

 

कटकमदाग हादसे की पीड़िता के परिवार की मदद को आगे आया प्रशासन प्रकोष्ठ: राशन सामग्री और वस्त्रों का किया गया वितरण

"भारतीय प्रशासनिक लोक शिकायत एवं प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों ने बच्ची को दिया भविष्य में मुफ्त शिक्षा का भरोसा; निस्वार्थ योगदान को बताया मानवता की सच्ची मिसाल"— विशेष रिपोर्ट

सामाजिक एवं प्रशासनिक ब्यूरो, हजारीबाग

  • रिपोर्टर: जिला संवाददाता (News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): भारतीय प्रशासनिक लोक शिकायत एवं प्रकोष्ठ (IPGC) प्रेस विज्ञप्ति (दिनांक: 10 जून 2026)

हजारीबाग:

हजारीबाग जिले के कटकमदाग में हाल ही में हुए बेहद दुखद हादसे की पीड़िता के परिवार को संबल देने के लिए सामाजिक संगठन और प्रबुद्ध नागरिक आगे आए हैं। मानवता की भावना और सामाजिक सहयोग के तहत 'भारतीय प्रशासनिक लोक शिकायत एवं प्रकोष्ठ' (IPGC) द्वारा पीड़ित परिवार से मुलाकात की गई। संगठन के पदाधिकारियों और स्थानीय समाजसेवियों के संयुक्त प्रयासों से पीड़ित परिवार को तत्काल राहत पहुंचाते हुए राशन सामग्री और वस्त्र प्रदान किए गए। इस नेक कार्य में सभी सहयोगकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और संकट की इस घड़ी में जरूरतमंद परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।

🤝 मानवता की मिसाल: कटकमदाग हादसे की पीड़िता के साथ खड़ा हुआ 'प्रशासन प्रकोष्ठ'; राशन वितरण के साथ बच्ची की शिक्षा की ली जिम्मेदारी!

बच्ची की शिक्षा की जिम्मेदारी उठाएगा आईपीजीसी (IPGC) परिवार

​इस मानवीय पहल के दौरान प्रकोष्ठ के प्रदेश उप सचिव कुमार गौरव ने हादसे से प्रभावित बच्ची से बात की और उसे ढांढस बंधाया। उन्होंने बच्ची को पूर्ण रूप से आश्वस्त किया कि भविष्य में उसकी पढ़ाई-लिखाई में आने वाले किसी भी व्यवधान को दूर करने के लिए आईपीजीसी (IPGC) परिवार की ओर से हर संभव वित्तीय और शैक्षणिक सहायता दी जाएगी। उपस्थित सदस्यों ने कहा कि ऐसे मानवीय कार्य समाज में एकता, करुणा और परस्पर सहयोग की भावना को मजबूत करते हैं।

राहत अभियान में इन प्रमुख पदाधिकारियों और समाजसेवियों का रहा योगदान

​अन्नदान एवं वस्त्रदान के इस पुण्य कार्य को सफल बनाने और पीड़ित परिवार तक सीधी सहायता पहुंचाने में संगठन के निम्नलिखित पदाधिकारियों और समाजसेवियों की मुख्य भूमिका रही:

  • कुमार गौरव (प्रदेश उप सचिव, भारतीय प्रशासनिक लोक शिकायत एवं प्रकोष्ठ)
  • विक्रमादित्य सिंह (जिला अध्यक्ष)
  • राज कुमार पासवान (जिला सचिव)
  • निमेष कुमार (मीडिया प्रभारी)
  • पप्पू प्रजापति (उपाध्यक्ष)
  • प्रदीप मेहता (वरिष्ठ समाजसेवी)
  • मनीष कुमार, पुनीत राम, रंजन गुप्ता और अंकिता मेहरा (सक्रिय सदस्य)

​संगठन के नेतृत्व ने इस निस्वार्थ योगदान को मानवता की सच्ची मिसाल बताते हुए कहा कि सभी सम्मानित सदस्यों की संवेदनशीलता और सेवा भाव के कारण ही पीड़ित परिवार के चेहरों पर मुस्कान लाना संभव हो सका है।

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड ( विधिक व सामाजिक सुरक्षा ज्ञान / Social Welfare Framework)

​📌 जानिए क्या हैं पीड़ित परिवारों के लिए सरकारी और विधिक सहायता के नियम?

  • आपदा एवं दुर्घटना मुआवजा: झारखंड सरकार के नियमानुसार किसी भी बड़े हादसे या दुर्घटना के शिकार परिवारों को जिला प्रशासन (Disaster Management Department) के माध्यम से त्वरित अनुग्रह राशि (Ex-gratia) और अंत्येष्टि सहायता दी जाती है।
  • बाल संरक्षण और मुफ्त शिक्षा: 'बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय आयोग' (NCPCR) और शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत, किसी भी हादसे में अनाथ या प्रभावित हुए बच्चों को मुफ्त अनिवार्य शिक्षा और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) जैसी आवासीय संस्थाओं में प्राथमिकता के आधार पर नामांकन का विधिक अधिकार प्राप्त है।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: संकट के समय पीड़ित परिवारों को सामाजिक संबल देना जरूरी (Editorial)

सरकारी सहायता की सुस्ती के बीच सामाजिक संगठनों का आगे आना समाज की जीवंतता का प्रतीक

हजारीबाग के कटकमदाग में हुआ हादसा बेहद हृदयविदारक था। ऐसे समय में जब प्रशासनिक मुआवजा प्रक्रियाओं में अक्सर फाइलों का लंबा सफर तय करना पड़ता है, 'भारतीय प्रशासनिक लोक शिकायत एवं प्रकोष्ठ' (IPGC) का जमीन पर उतरकर राशन और वस्त्र पहुंचाना सराहनीय है। सबसे महत्वपूर्ण बात प्रदेश उप सचिव कुमार गौरव द्वारा पीड़ित बच्ची की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने का आश्वासन देना है। किसी पीड़ित परिवार के लिए तात्कालिक राशन से ज्यादा जरूरी उसका भविष्य सुरक्षित करना होता है। 'न्यूज़ प्रहरी' का मानना है कि समाज के अन्य सक्षम लोगों और जिला प्रशासन को भी इस बच्ची के दीर्घकालिक पुनर्वास के लिए आगे आना चाहिए ताकि उसका भविष्य अंधकारमय न हो।

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हजारीबाग एसबीआई मुख्य शाखा में वरिष्ठ नागरिकों के लिए विधिक जागरूकता शिविर आयोजित: मुफ्त कानूनी सहायता की मिली विस्तृत जानकारी


झारखंड राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की आपात बैठक में हंगामा: परिमल नाथवानी के नामांकन को वैध बताने पर जताया कड़ा विरोध

झारखंड राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की आपात बैठक में हंगामा: परिमल नाथवानी के नामांकन को वैध बताने पर जताया कड़ा विरोध

"चुनाव आयोग के फैसले से लोकतंत्र शर्मसार; राज्यसभा प्रत्याशी प्रणब झा, मंत्री दीपिका पांडे सिंह और विधायक दल के उपनेता राजेश कच्छप सहित वरिष्ठ नेताओं ने केंद्र पर साधा निशाना"— विशेष रिपोर्ट

राजनीतिक ब्यूरो, रांची

  • रिपोर्टर: विशेष संवाददाता (News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी / विधानसभा ब्यूरो (दिनांक: 10 जून 2026)

रांची:

झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले सियासी पारा पूरी तरह गरमा गया है। झारखंड विधानसभा परिसर में कांग्रेस पार्टी की ओर से एक भव्य और अति महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई, जिसमें आगामी चुनाव की रणनीतियों और हालिया घटनाक्रमों पर विस्तृत चर्चा की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य चुनाव आयोग द्वारा परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र को कथित तौर पर गलत तरीके से वैध (Valid) घोषित किए जाने के खिलाफ रणनीति तैयार करना और इस विधिक प्रक्रिया पर सामूहिक विचार-विमर्श करना था। बैठक में उपस्थित कांग्रेस के तमाम शीर्ष नेताओं ने चुनाव आयोग के इस फैसले पर गहरी आपत्ति जताते हुए इसका पुरजोर विरोध किया।

"झारखंड राज्यसभा चुनाव से पहले रांची में सियासी भूचाल आ गया है! परिमल नाथवानी के नामांकन को लेकर कांग्रेस ने सीधे चुनाव आयोग पर बड़ा हमला बोला है!"

लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति: कांग्रेस नेतृत्व

​बैठक के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और विधायकों ने एक सुर में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। नेताओं ने कहा कि जिस प्रकार नियमों को ताक पर रखकर परिमल नाथवानी के नामांकन को हरी झंडी दी गई है, वह पूरी तरह असंवैधानिक है। इस तरह की हरकतों से न केवल लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता खत्म होती है, बल्कि संपूर्ण लोकतंत्र शर्मसार होता है। कांग्रेस नेतृत्व ने इसे भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास के लिए एक अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक स्थिति करार दिया।

बैठक में महागठबंधन और कांग्रेस के ये दिग्गज रहे मौजूद

​राज्यसभा चुनाव की इस रणनीति बैठक में कांग्रेस और सत्ताधारी गठबंधन के कई कद्दावर चेहरे शामिल हुए, जिनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित नेता उपस्थित थे:

  • प्रणब झा (कांग्रेस के आधिकारिक राज्यसभा प्रत्याशी)
  • दीपिका पांडे सिंह (कैबिनेट मंत्री, झारखंड सरकार)
  • राजेश कच्छप (कांग्रेस विधायक दल के उपनेता)
  • राजेश ठाकुर (कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष)
  • अनुप सिंह (विधायक, बेरमो)
  • विक्सल कोंगारी (विधायक, कोलेबिरा)
  • रियाज अहमद (वरिष्ठ कांग्रेस नेता)

​बैठक में इन सभी नेताओं के अलावा कई अन्य विधायकों और पदाधिकारियों ने भी अपनी बात रखी। इसके साथ ही राज्यसभा चुनाव की वोटिंग रणनीति, विधायकों की एकजुटता और राज्य के कई अन्य ज्वलंत राजनीतिक विषयों पर भी घंटों गहन मंथन किया गया।

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड ( विधिक व चुनावी ज्ञान / Rajya Sabha Election Framework)

​📌 जानिए कैसे होता है राज्यसभा चुनाव में नामांकन पत्रों की जांच (Scrutiny) का नियम?

  • नामांकन की जांच (Scrutiny of Nomination): लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 36 के तहत रिटर्निंग ऑफिसर (RO) को यह शक्ति प्राप्त है कि वह उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों की जांच करे। यदि प्रस्तावक के हस्ताक्षर, शपथ पत्र (Affidavit) में विसंगति या लाभ के पद (Office of Profit) से जुड़ा कोई गंभीर मामला पाया जाता है, तो नामांकन रद्द किया जा सकता है।
  • अदालती चुनौती: यदि कोई राजनीतिक दल या प्रत्याशी चुनाव आयोग या रिटर्निंग ऑफिसर के किसी फैसले को गलत मानता है, तो वह चुनाव संपन्न होने के बाद संबंधित उच्च न्यायालय (High Court) में 'चुनाव याचिका' (Election Petition) दायर कर उस फैसले को विधिक चुनौती दे सकता है।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: राज्यसभा की जंग और झारखंड की दिलचस्प होती सियासत (Editorial)

नामांकन विवाद से कड़ा हुआ राज्यसभा का मुकाबला; साख बचाने की लड़ाई में उतरा सत्तारूढ़ गठबंधन

झारखंड से राज्यसभा की सीटों के लिए होने वाला यह मुकाबला अब सिर्फ मतों की गणित तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक बड़े कानूनी और नैतिक युद्ध में बदल चुका है। कांग्रेस प्रत्याशी प्रणब झा के समर्थन में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर, मंत्री दीपिका पांडे सिंह और उपनेता राजेश कच्छप जैसे दिग्गजों का एक मंच पर आना यह दिखाता है कि पार्टी परिमल नाथवानी के मुद्दे पर बैकफुट पर जाने को तैयार नहीं है। चुनाव आयोग के फैसले को 'लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला' बताना यह साफ करता है कि आने वाले दिनों में यह विवाद झारखंड विधानसभा से लेकर कोर्ट के कमरों तक गूंजेगा। जेएमएम और कांग्रेस गठबंधन के लिए यह चुनाव मुख्यमंत्री हेमंत सरेन और कल्पना मुर्मू सोरेन के नेतृत्व की भी बड़ी परीक्षा है, जहां उन्हें अपने विधायकों को क्रास वोटिंग से बचाते हुए प्रणब झा की जीत सुनिश्चित करनी होगी।

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हजारीबाग राजस्व समीक्षा बैठक में कड़े तेवर: प्रमंडलीय आयुक्त विजय कुमार गुप्ता ने कहा- दाखिल खारिज में लापरवाही पर अंचल अधिकारियों पर होगी सीधी कार्रवाई

 

हजारीबाग राजस्व समीक्षा बैठक में कड़े तेवर: प्रमंडलीय आयुक्त विजय कुमार गुप्ता ने कहा- दाखिल खारिज में लापरवाही पर अंचल अधिकारियों पर होगी सीधी कार्रवाई

"सरकारी भूमि को अतिक्रमणमुक्त करने के लिए उपायुक्त हेमंत सती का सख्त निर्देश; परिवहन, खनन, उत्पाद और नगर निगम को अपनी वैधानिक शक्तियों का प्रयोग कर लक्ष्य प्राप्ति के आदेश"— प्रमंडलीय ब्यूरो

प्रशासनिक ब्यूरो, हजारीबाग

  • रिपोर्टर: ब्यूरो चीफ (News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): प्रमंडलीय सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल, हजारीबाग (प्रेस विज्ञप्ति संख्या: 361/10.06.2026, दिनांक: 10 जून 2026)

हजारीबाग:

हजारीबाग समाहरणालय के सभाकक्ष में जिले के विभिन्न विभागों के राजस्व संग्रहण (Revenue Collection) से संबंधित एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रमंडलीय समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के प्रमंडलीय आयुक्त विजय कुमार गुप्ता ने दो टूक शब्दों में कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी कार्यों को गति देने के लिए राजस्व में वृद्धि अनिवार्य है। उन्होंने सभी विभागीय अधिकारियों को कड़ा निर्देश दिया कि वे अपनी समस्त वैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य आधारित राजस्व की प्राप्ति हर हाल में सुनिश्चित करें। आयुक्त ने कहा कि अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने नियमों, शासनादेशों और प्रक्रियाओं की जितनी बेहतर जानकारी होगी, वे उतना ही पारदर्शी और मजबूत काम कर सकेंगे।

"हजारीबाग में दाखिल-खारिज और सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे को लेकर प्रमंडलीय आयुक्त और उपायुक्त ने अधिकारियों को बेहद कड़े निर्देश जारी किए हैं!"

दाखिल-खारिज में देरी पर लगेगा सेवा अधिकार अधिनियम (RTPS)

​लंबित दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के मामलों पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए आयुक्त विजय कुमार गुप्ता ने सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDO) और अंचल अधिकारियों (CO) को चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि दाखिल-खारिज के मामलों में किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि तय समय सीमा के भीतर म्यूटेशन के मामलों का निष्पादन नहीं किया गया, तो संबंधित अंचल अधिकारी के विरुद्ध सेवा अधिकार अधिनियम के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी।

सरकारी और वन भूमि को अतिक्रमणमुक्त रखने का उपायुक्त हेमंत सती का निर्देश

​बैठक में विशेष रूप से मौजूद हजारीबाग के उपायुक्त हेमंत सती ने भूमि संरक्षण को लेकर कड़े निर्देश जारी किए। उपायुक्त ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण, अनधिकृत गतिविधि या अतिक्रमण किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने सभी अंचलाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सरकारी जमीनों पर किए गए कब्जों को चिन्हित कर त्वरित रूप से अतिक्रमणमुक्त कराने के लिए विशेष अभियान चलाएं और उसकी नियमित ऑन-फील्ड निगरानी सुनिश्चित करें।

विभिन्न तकनीकी व राजस्व विभागों की बिंदुवार समीक्षा एवं आयुक्त के कड़े निर्देश:

  • परिवहन विभाग: जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) को दलालों और बिचौलियों पर पूरी तरह अंकुश लगाने का निर्देश दिया गया। ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन पंजीकरण जैसी सेवाओं को इतना सरल और सुगम बनाया जाए कि आम जनता को वेंडरों पर निर्भर न रहना पड़े। डिफॉल्टर, ओवरलोड वाहनों और अवैध बसों के खिलाफ सघन जांच अभियान चलाने को कहा गया।
  • उत्पाद विभाग: बिहार सीमा क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए आयुक्त ने गुप्तचर तंत्र (Intelligence Network) को सक्रिय करने का आदेश दिया। अवैध शराब निर्माण, तस्करी और भट्टियों को ध्वस्त करने के लिए सघन छापेमारी अभियान चलाने का निर्देश दिया गया।
  • खनन विभाग: विभिन्न नदी घाटों से हो रहे अवैध बालू उठाव और अवैध खनन पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए गए। बिना वैध दस्तावेजों के खनिज ढोने वाले वाहनों के खिलाफ एमएमडीआर (MMDR) अधिनियम के तहत कठोर विधिक कार्रवाई करने को कहा गया।
  • वाणिज्य कर विभाग: जीएसटी (GST) का नियमित भुगतान न करने वाले ठेकेदारों और व्यवसायियों की सूची तैयार कर कर चोरी पर प्रभावी नियंत्रण लगाने का आदेश दिया गया।
  • नगर निगम: राजस्व संग्रहण बढ़ाने के साथ-साथ हजारीबाग झील परिसर में हाई मास्ट लाइट लगाने, नियमित साफ-सफाई, फॉगिंग कराने और सार्वजनिक स्थानों पर शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
  • माप-तौल एवं मत्स्य विभाग: पेट्रोल पंपों का नियमित निरीक्षण करने और बड़े जलाशयों में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए अंतर्विभागीय समन्वय का निर्देश दिया गया।

भू-अर्जन और आधारभूत संरचनाओं की समीक्षा

​बैठक के दौरान जिले में चल रही बड़ी आधारभूत संरचना परियोजनाओं जैसे एनटीपीसी (NTPC), विभिन्न कोल कंपनियों और एनएचएआई (NHAI) से जुड़े भू-अर्जन मामलों की भी विस्तृत समीक्षा की गई। इसके तहत म्यूटेशन, एलपीसी (LPC), लीज, जीएम जेजे भूमि, आंगनबाड़ी केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, विद्यालय, पैक्स भवनों के स्थानांतरण, ट्रांसमिशन लाइन तथा वनाधिकार अधिनियम (FRA) से जुड़े मामलों के त्वरित निष्पादन हेतु भवन प्रमंडल के सहायक अभियंता को भवन मूल्यांकन कार्य जल्द पूरा करने का निर्देश दिया गया।

बैठक में ये वरिष्ठ अधिकारी रहे उपस्थित

​इस उच्च स्तरीय प्रमंडलीय बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे:

  • ​हेमंत सती (उपायुक्त, हजारीबाग)
  • ​रिया सिंह (उपविकास आयुक्त, हजारीबाग)
  • ​ओमप्रकाश गुप्ता (नगर आयुक्त, हजारीबाग)
  • ​महेंद्र छोटन उरांव (अपर समाहर्ता, हजारीबाग)
  • ​जोहन टुडू (अनुमंडल पदाधिकारी, बरही)
  • ​प्रमंडल के सभी अंचल अधिकारी (CO), विभिन्न विभागों के पदाधिकारी एवं कोल कंपनियों के आधिकारिक प्रतिनिधि।

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड ( विधिक व प्रशासनिक ज्ञान / Revenue & RTPS Framework)

​📌 जानिए क्या है सेवा अधिकार अधिनियम (Right to Service Act) और म्यूटेशन की विधिक समय सीमा?

  • सेवा अधिकार अधिनियम (RTPS): इस कानून के तहत आम नागरिकों को सरकारी सेवाएं (जैसे जाति, आवासीय प्रमाण-पत्र या दाखिल-खारिज) एक निश्चित समय सीमा के भीतर देना अनिवार्य है। यदि कोई अधिकारी बिना किसी ठोस विधिक कारण के फाइल रोकता है, तो उस पर वित्तीय जुर्माना और विभागीय कार्रवाई का प्रावधान है।
  • MMDR अधिनियम: खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम के तहत बिना वैध चालान या लीज के खनिजों (जैसे बालू, कोयला, पत्थर) का उत्खनन और परिवहन गैर-कानूनी है, जिसमें वाहन जब्ती और गैर-जमानती प्राथमिकी (FIR) का प्रावधान है।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: जनहित के लिए कड़े प्रशासनिक फैसले और भ्रष्टाचार पर चोट जरूरी (Editorial)

सिस्टम की सुस्ती पर आयुक्त के कड़े तेवर स्वागत योग्य, पर जमीनी स्तर पर अंचल कार्यालयों की कार्यशैली बदलना बड़ी चुनौती

उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के आयुक्त विजय कुमार गुप्ता द्वारा दाखिल-खारिज में देरी पर अंचल अधिकारियों (CO) के खिलाफ सीधे सेवा अधिकार अधिनियम के तहत कार्रवाई की चेतावनी देना एक बेहद जरूरी और साहसिक कदम है। झारखंड में अंचल कार्यालयों (अंचलाधिकारी और राजस्व कर्मचारियों) की कार्यप्रणाली को लेकर आम जनता हमेशा त्रस्त रहती है। जमीन का म्यूटेशन कराने के लिए गरीबों को महीनों अंचल के चक्कर काटने पड़ते हैं। इसी तरह, उपायुक्त हेमंत सती का सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने का निर्देश भी हजारीबाग की शहरी और ग्रामीण व्यवस्था को बचाने के लिए आवश्यक है। 'न्यूज प्रहरी' का मानना है कि ये निर्देश केवल फाइलों तक सीमित न रहें; जब तक दो-चार दोषी अधिकारियों पर असल में दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक बिचौलियों का तंत्र और अंचल कार्यालयों की सुस्ती खत्म होना नामुमकिन है।

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हजारीबाग एसबीआई मुख्य शाखा में वरिष्ठ नागरिकों के लिए विधिक जागरूकता शिविर आयोजित: मुफ्त कानूनी सहायता की मिली विस्तृत जानकारी

 

हजारीबाग एसबीआई मुख्य शाखा में वरिष्ठ नागरिकों के लिए विधिक जागरूकता शिविर आयोजित: मुफ्त कानूनी सहायता की मिली विस्तृत जानकारी

"प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश धुव्र चंद्र मिश्रा के देखरेख में हुआ कार्यक्रम; प्राधिकार सचिव रवि प्रकाश तिवारी और अधिकार मित्र बिकाश कुमार पाण्डेय ने अधिकारों के प्रति किया जागरूक"— न्यूज़ प्रहरी विशेष

विधिक ब्यूरो, हजारीबाग

  • रिपोर्टर: ब्यूरो चीफ (News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), हजारीबाग (दिनांक: 10 जून 2026)

हजारीबाग:

झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा), रांची के दिशा-निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए), हजारीबाग के तत्वावधान में बुधवार को एक महत्वपूर्ण विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह विशेष शिविर हजारीबाग स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की मुख्य शाखा में संचालित 'वरिष्ठजन सहायता एवं सुविधा केंद्र' में आयोजित हुआ। पूरा कार्यक्रम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश धुव्र चंद्र मिश्रा की कुशल देखरेख और मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इस संबंध में विस्तृत जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव रवि प्रकाश तिवारी ने मीडिया को दी।

"हजारीबाग के वरिष्ठ नागरिकों को उनके कानूनी हक दिलाने और मुफ्त कानूनी मदद पहुंचाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने एक बेहतरीन कदम उठाया है!"

माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम की दी गई जानकारी

​शिविर के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकार मित्र बिकाश कुमार पाण्डेय ने वहां उपस्थित वरिष्ठ नागरिकों, बैंक उपभोक्ताओं और आमजनों को उनके कानूनी अधिकारों, संरक्षण, सामाजिक कल्याण और राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली निःशुल्क विधिक सहायता से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान कीं।

  • "हजारीबाग के वरिष्ठ नागरिकों को उनके कानूनी हक दिलाने और मुफ्त कानूनी मदद पहुंचाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने एक बेहतरीन कदम उठाया है!"
अधिकार मित्र ने विशेष रूप से 'माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007' के विभिन्न कानूनी प्रावधानों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस कानून के तहत वरिष्ठ नागरिकों को गरिमापूर्ण जीवन जीने, बच्चों या उत्तराधिकारियों से भरण-पोषण प्राप्त करने और अपनी संपत्ति की सुरक्षा करने के क्या-क्या विधिक अधिकार प्राप्त हैं। इसके साथ ही बुजुर्गों के लिए चलाई जा रही विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और डीएलएसए के माध्यम से विधिक सहायता प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया को विस्तार से समझाया गया।

हेल्पलाइन नंबर 15100 के जरिए घर बैठे मिलेगी कानूनी मदद

​जागरूकता शिविर में बुजुर्गों की समस्याओं को सुनते हुए मौके पर ही आवश्यक कानूनी परामर्श भी प्रदान किया गया। अधिकार मित्र ने बताया कि वरिष्ठजन सहायता केंद्र के माध्यम से बुजुर्गों को लगातार मार्गदर्शन दिया जा रहा है। कार्यक्रम में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से जारी नालसा (NALSA) निःशुल्क हेल्पलाइन नंबर 15100 की जानकारी भी सभी के साथ साझा की गई। उपस्थित लोगों से अपील की गई कि किसी भी प्रकार के शोषण, उपेक्षा या कानूनी अड़चन की स्थिति में वे बिना किसी संकोच के जिला विधिक सेवा प्राधिकार, हजारीबाग के कार्यालय से संपर्क कर मुफ्त वकील और कानूनी सहायता का लाभ उठा सकते हैं।

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड ( विधिक व न्यायिक ज्ञान / Maintenance & Welfare Act)

​📌 जानिए क्या है माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम, 2007?

  • कानूनी अधिकार: इस अधिनियम के तहत यदि कोई बच्चा या संबंधी अपने माता-पिता या वरिष्ठ नागरिक की देखरेख नहीं करता है, तो बुजुर्ग व्यक्ति 'भरण-पोषण अधिकरण' (Maintenance Tribunal) में शिकायत दर्ज करा सकता है। अधिकरण बच्चों को प्रति माह अधिकतम 10,000 रुपये (या राज्य सरकार द्वारा संशोधित राशि) तक भरण-पोषण भत्ता देने का आदेश दे सकता है।
  • मुफ्त कानूनी सहायता (Section 12 of LSA Act): कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम के तहत देश के सभी वरिष्ठ नागरिक (बुजुर्ग) बिना किसी आय सीमा की बाध्यता के, सरकारी खर्च पर मुफ्त कानूनी सहायता, विधिक परामर्श और अदालत में पैरवी के लिए सरकारी वकील प्राप्त करने के हकदार हैं।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: बैंकों में विधिक शिविर लगाना जिला विधिक सेवा प्राधिकार की बेहतरीन रणनीति (Editorial)

वरिष्ठ नागरिकों की आर्थिक सुरक्षा के केंद्र 'बैंक' में जागरूकता शिविर का आयोजन सराहनीय और प्रभावी

समाज के सबसे संवेदनशील हिस्से, यानी हमारे बुजुर्गों को कानून की जानकारी उनके रोजमर्रा के स्थानों पर देना एक बेहतरीन प्रशासनिक पहल है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार हजारीबाग द्वारा भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा को इस शिविर के लिए चुनना बेहद दूरदर्शी कदम है, क्योंकि पेंशन और बैंकिंग कार्यों के लिए बुजुर्गों का सबसे ज्यादा आना-जाना यहीं होता है। अक्सर देखने में आता है कि कानून की पेचीदगियों और कोर्ट-कचहरी के डर से बुजुर्ग अपने हक की आवाज नहीं उठा पाते। नालसा हेल्पलाइन 15100 और प्राधिकार सचिव रवि प्रकाश तिवारी की अगुवाई में चलाया जा रहा यह अभियान तभी पूरी तरह सफल होगा, जब समाज का हर व्यक्ति अपने आसपास रहने वाले बेसहारा बुजुर्गों को डीएलएसए के इस मुफ्त विधिक मंच तक पहुंचाने में मददगार बनेगा।

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झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा की बड़ी बैठक आज: जयराम कुमार महतो ने उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के जिला प्रभारियों को किया तलब

झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा की बड़ी बैठक आज: जयराम कुमार महतो ने उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के जिला प्रभारियों को किया तलब

"बोकारो और रामगढ़ जिला पुनर्गठन कार्यक्रम की तिथि और रणनीतियों पर होगा अंतिम निर्णय; केंद्रीय समिति के निर्देश पर शाम 6 बजे बुलाई गई आवश्यक बैठक"— न्यूज़ प्रहरी विशेष

राजनीतिक ब्यूरो, बोकारो/धनबाद

  • रिपोर्टर: ब्यूरो चीफ (News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): केंद्रीय कार्यालय, जेएलकेएम (पत्रांक संख्या: JLKM/CP/39/26, दिनांक: 10 जून 2026)

बोकारो:

झारखंड की राजनीति में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे दल 'झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा' (JLKM) के सांगठनिक ढांचे को नए सिरे से मजबूत करने की कवायद तेज हो गई है। केंद्रीय समिति के निर्देशानुसार आज यानी 10 जून 2026 को शाम 06:00 बजे एक अति आवश्यक सांगठनिक बैठक आयोजित की गई है। इस हाई-लेवल बैठक की अध्यक्षता जेएलकेएम के केंद्रीय अध्यक्ष सह डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो द्वारा की जा रही है। बैठक को लेकर पार्टी के केंद्रीय कार्यालय द्वारा आधिकारिक पत्र (228685.jpg) जारी कर सभी संबंधित पदाधिकारियों को सूचित कर दिया गया है।

(228685.jpg)

उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के इन 5 जिला प्रभारियों की बैठक

​सांगठनिक दृष्टिकोण से बुलाई गई इस अति आवश्यक बैठक में मुख्य रूप से उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले सभी पाँचों जिलों के प्रभारियों को अनिवार्य रूप से शामिल होने का निर्देश दिया गया है। बैठक में प्रमंडल के सांगठनिक विस्तार, बूथ स्तर की तैयारियों और कार्यकर्ताओं के सक्रिय जुड़ाव को लेकर गहन मंथन होना है।

बोकारो और रामगढ़ जिला पुनर्गठन पर लिया जाएगा अंतिम निर्णय

​साझा किए गए आधिकारिक पत्र (228685.jpg) के अनुसार, इस आपातकालीन बैठक का मुख्य एजेंडा दो प्रमुख जिलों के संगठन से जुड़ा हुआ है:

​"बैठक का मुख्य उद्देश्य बोकारो एवं रामगढ़ जिला पुनर्गठन कार्यक्रम की तिथि, समय एवं अन्य आवश्यक तैयारियों पर विचार-विमर्श कर अंतिम निर्णय लेना है। अतः सभी संबंधित प्रभारियों से अनुरोध है कि निर्धारित समय पर अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करें, ताकि आवश्यक निर्णय समयबद्ध रूप से लिए जा सकें।"


​राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि बोकारो और रामगढ़ में पार्टी अपने सांगठनिक ढांचे में बड़ा फेरबदल कर सकती है, जिससे नए और जुझारू कार्यकर्ताओं को कमान सौंपी जा सके।

जेएलकेएम केंद्रीय व आवासीय कार्यालय का आधिकारिक विवरण

​पार्टी द्वारा जारी लेटरहेड के अनुसार, संगठन के मुख्य प्रशासनिक केंद्रों का विवरण निम्नलिखित है:

  • केंद्रीय कार्यालय: इन्द्रपुरी कॉलोनी बधराशबेटा, पो०- सतनपुर, थाना- सेक्टर 12, जिला- बोकारो (झारखंड) - 827013
  • आवासीय कार्यालय: मानटॉड़, पो०+थाना- तोपचांची, जिला- धनबाद (झारखंड) - 828402
  • डिजिटल संपर्क: ई-मेल (tigerjairamofficial@gmail.com) एवं आधिकारिक वेबसाइट (www.jlkmparty.org)

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड ( सांगठनिक व राजनीतिक ज्ञान / Political Party Framework)

​📌 जानिए क्या होता है राजनीतिक दलों में 'जिला पुनर्गठन' का महत्व?

  • सांगठनिक पुनर्गठन (Organizational Restructuring): किसी भी राजनीतिक दल के लिए जिला पुनर्गठन एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया है। इसके तहत पुराने या निष्क्रिय पदाधिकारियों को बदलकर नए चेहरों को जिला अध्यक्ष, सचिव या कोर कमेटी में जगह दी जाती है, ताकि स्थानीय स्तर पर पार्टी विरोधी लहर या सुस्ती को खत्म किया जा सके।
  • समयबद्ध निर्णय की अनिवार्यता: आगामी चुनावों या आंदोलनों को ध्यान में रखते हुए जिला पुनर्गठन की रूपरेखा तैयार की जाती है। बोकारो और रामगढ़ जैसे कोयलांचल और औद्योगिक क्षेत्रों में सांगठनिक पकड़ मजबूत करना किसी भी क्षेत्रीय दल के लिए जनाधार बढ़ाने की पहली शर्त होती है।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: कोयलांचल में सांगठनिक पैठ मजबूत करने की कवायद में 'टाईगर' जयराम महतो (Editorial)

बोकारो और रामगढ़ में सांगठनिक बदलाव के संकेत; क्या नए चेहरों के भरोसे जंग फतह करेगी जेएलकेएम?

झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के केंद्रीय अध्यक्ष और डुमरी के विधायक जयराम कुमार महतो युवाओं के बीच अपनी आक्रामक और माटी से जुड़ी राजनीति के लिए जाने जाते हैं। उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के 5 जिला प्रभारियों की यह बैठक स्पष्ट संकेत देती है कि जयराम महतो अब सिर्फ आंदोलनों तक सीमित न रहकर पार्टी को एक कॉरपोरेट और अनुशासित सांगठनिक ढांचे में ढालना चाहते हैं। बोकारो और रामगढ़ जिलों का पुनर्गठन इस दिशा में बड़ा कदम है। इन दोनों जिलों में पार्टी के भीतर अंदरूनी खींचतान और नए-पुराने कार्यकर्ताओं के बीच सामंजस्य की जो कमी दिख रही थी, उसे दूर करने के लिए खुद केंद्रीय अध्यक्ष ने मोर्चा संभाला है। देखना दिलचस्प होगा कि इस बैठक के बाद जो नई कमेटियां सामने आती हैं, वे जमीनी स्तर पर पार्टी को कितना फायदा पहुंचा पाती हैं।

और पढ़ें : अहमदाबाद मेट्रो रेल प्रोजेक्ट फेज़ 2A को केंद्रीय कैबिनेट की हरी झंडी: एयरपोर्ट कॉरिडोर को मिली मंजूरी, 2,169 करोड़ रुपये होंगे खर्च



अहमदाबाद मेट्रो रेल प्रोजेक्ट फेज़ 2A को केंद्रीय कैबिनेट की हरी झंडी: एयरपोर्ट कॉरिडोर को मिली मंजूरी, 2,169 करोड़ रुपये होंगे खर्च

 

अहमदाबाद मेट्रो रेल प्रोजेक्ट फेज़ 2A को केंद्रीय कैबिनेट की हरी झंडी: एयरपोर्ट कॉरिडोर को मिली मंजूरी, 2,169 करोड़ रुपये होंगे खर्च

"प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में लिया गया बड़ा फैसला; 6 किलोमीटर लंबे नए रूट पर बनेंगे 5 स्टेशन, जुड़वां शहरों का मेट्रो नेटवर्क बढ़कर होगा 77.63 किलोमीटर"— पीआईबी

राष्ट्रीय ब्यूरो, नई दिल्ली/अहमदाबाद

  • रिपोर्टर: नेशनल डेस्क (News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): पत्र सूचना कार्यालय (PIB), भारत सरकार (दिनांक: 10 जून 2026)

नई दिल्ली:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल (केंद्रीय कैबिनेट) ने अहमदाबाद मेट्रो रेल परियोजना के फेज़ 2A (Phase 2A) को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस नए फेज़ के तहत कोटेश्वर रोड से लेकर एयरपोर्ट कॉरिडोर तक मेट्रो नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। इस परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद अहमदाबाद और गांधीनगर के जुड़वां शहरों में सक्रिय मेट्रो रेल नेटवर्क की कुल लंबाई बढ़कर 77.63 किलोमीटर हो जाएगी, जो गुजरात के शहरी परिवहन के इतिहास में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।

"अहमदाबाद और गांधीनगर के यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी! अब सीधे मेट्रो से जा सकेंगे एयरपोर्ट, मोदी कैबिनेट ने दी मेगा प्रोजेक्ट को मंजूरी!"

परियोजना की लागत और रूट का पूरा विवरण

​केंद्रीय कैबिनेट द्वारा स्वीकृत विवरण के अनुसार, अहमदाबाद मेट्रो फेज़ 2A की कुल लंबाई 6.032 किलोमीटर होगी। इस नए कॉरिडोर की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • कुल लागत: निर्माण के दौरान लगने वाले ब्याज (IDC) सहित इस प्रोजेक्ट की कुल समापन लागत 2,169.04 करोड़ रुपये आंकी गई है।
  • स्टेशनों की संख्या: इस पूरे रूट पर कुल 05 स्टेशन बनाए जाएंगे, जिनमें से 04 स्टेशन एलिवेटेड (जमीन से ऊपर) और 01 स्टेशन अंडरग्राउंड (भूमिगत) होगा।
  • स्टेशनों के नाम: इस नए कॉरिडोर में शामिल होने वाले स्टेशनों के नाम आश्रम रोड, कोटेश्वर प्राचीन मंदिर, साबरमती रिवर, सरदार नगर और एयरपोर्ट निर्धारित किए गए हैं।

रोजगार के नए अवसरों का होगा सृजन

​बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ यह प्रोजेक्ट रोजगार के मोर्चे पर भी बड़ी राहत लेकर आएगा। अहमदाबाद मेट्रो फेज़ 2A के निर्माण कार्य के चरम (Peak Period) के दौरान लगभग 2,000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। इसके अलावा, मेट्रो के सुचारू संचालन और रखरखाव (Operation & Maintenance) के चरण में लगभग 500 लोगों को स्थायी रूप से काम मिलने की संभावना है।

प्रोजेक्ट के बहुआयामी लाभ और भविष्य की खेल प्रतियोगिताएं

  • सुगम कनेक्टिविटी: यह नया फेज़ सीधे तौर पर अहमदाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को शहर के प्रमुख आवासीय और वाणिज्यिक हब से जोड़ेगा, जिससे स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को बिना किसी ट्रैफिक जाम के एयरपोर्ट तक निर्बाध पहुंच मिलेगी।
  • अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में मददगार: इस रूट के आसपास के क्षेत्रों में विश्व पुलिस खेल 2029 (World Police Games 2029) और राष्ट्रमंडल खेल 2030 (Commonwealth Games 2030) के लिए अत्याधुनिक खेल सुविधाएं विकसित होने की प्रबल संभावना है, जिसमें यह मेट्रो कॉरिडोर रीढ़ की हड्डी का काम करेगा।
  • ट्रैफिक जाम और प्रदूषण से राहत: मेट्रो का विस्तार होने से सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होगा, जिससे यात्रा के समय में बचत होगी और सड़क सुरक्षा बढ़ेगी। साथ ही, पारंपरिक जीवाश्म ईंधन (पेट्रोल-डीजल) पर निर्भरता कम होने से कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी।
  • आर्थिक और सामाजिक प्रभाव: रेलवे स्टेशनों, बस डिपो और एयरपोर्ट के बीच बेहतर तालमेल से व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे समाज के सभी वर्गों को समान रूप से किफायती सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध होगा, जिससे जीवन स्तर में सुधार आएगा।

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड ( तकनीकी व अवसंरचना ज्ञान / Metro Infrastructure Insights)

​📌 जानिए क्या होती है निर्माण के दौरान ब्याज (IDC) लागत और अंडरग्राउंड मेट्रो की चुनौतियाँ?

  • आईडीसी (Interest During Construction): किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए लिए गए लोन पर निर्माण अवधि के दौरान जो ब्याज बनता है, उसे प्रोजेक्ट की कुल लागत (Completion Cost) में ही जोड़ दिया जाता है। इसे विधिक व वित्तीय भाषा में 'आईडीसी' कहा जाता है।
  • अंडरग्राउंड बनाम एलिवेटेड स्टेशन: एलिवेटेड स्टेशनों की तुलना में अंडरग्राउंड (भूमिगत) स्टेशन के निर्माण में तीन गुना अधिक लागत आती है, क्योंकि इसमें टनल बोरिंग मशीनों (TBM) का उपयोग और सघन भूमिगत सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य होता है। फेज़ 2A में एयरपोर्ट के पास सुरक्षा कारणों से ही 1 अंडरग्राउंड स्टेशन का प्रावधान किया गया है।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: वैश्विक खेल आयोजनों और शहरी गतिशीलता की ओर बढ़ते कदम (Editorial)

कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 और वर्ल्ड पुलिस गेम्स का मजबूत आधार बनेगा अहमदाबाद मेट्रो का नया विस्तार

केंद्रीय कैबिनेट द्वारा अहमदाबाद मेट्रो फेज़ 2A को दी गई मंजूरी केवल एक यातायात कॉरिडोर का विस्तार नहीं है, बल्कि यह भारत के वैश्विक खेल हब बनने की तैयारियों का एक हिस्सा है। साल 2029 और 2030 में होने वाले अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के मद्देनजर एयरपोर्ट को मेट्रो ग्रिड से जोड़ना बेहद दूरदर्शी कदम है। 2,169 करोड़ रुपये का यह निवेश आने वाले समय में गुजरात के आर्थिक पहिए को और गति देगा। 'न्यूज प्रहरी' का मानना है कि इस प्रोजेक्ट की असली सफलता तब होगी जब निर्माण कार्य को तय समय सीमा के भीतर पूरा कर लिया जाए, ताकि आम जनता और आने वाले अंतरराष्ट्रीय मेहमानों को समय पर इसका लाभ मिल सके।

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चतरा में विकास योजनाओं के त्वरित निष्पादन को लेकर जिला प्रशासन गंभीर: उपायुक्त रवि आनंद ने वन विभाग से संबंधित लंबित मामलों की समीक्षा कर दिए कड़े निर्देश

 

चतरा में विकास योजनाओं के त्वरित निष्पादन को लेकर जिला प्रशासन गंभीर: उपायुक्त रवि आनंद ने वन विभाग से संबंधित लंबित मामलों की समीक्षा कर दिए कड़े निर्देश

"वनाधिकार अधिनियम, एनओसी और ग्राम सभा के प्रस्तावों को समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने का आदेश; आपसी समन्वय से दूर होंगी तकनीकी बाधाएं"— उपायुक्त

प्रशासनिक ब्यूरो, चतरा

  • रिपोर्टर: ब्यूरो चीफ (News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): जिला सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय (IPRD), चतरा

चतरा:

चतरा समाहरणालय स्थित सभा कक्ष में उपायुक्त रवि आनंद की अध्यक्षता में वन विभाग से संबंधित लंबित मामलों की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जिले के भीतर चल रही विभिन्न महत्वपूर्ण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में वन विभाग से संबंधित तकनीकी प्रक्रियाओं, जटिलताओं और अनुमतियों (क्लियरेंस) के कारण रुके या लंबित पड़े मामलों की बिंदुवार विस्तृत समीक्षा की गई।

चतरा में सड़क, बिजली और पानी की बंद पड़ी योजनाओं को चालू करने के लिए उपायुक्त रवि आनंद ने एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक कर अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं!"

सड़क, बिजली और पानी जैसी जन-उपयोगी योजनाओं की बिंदुवार समीक्षा

​समीक्षा के क्रम में उपायुक्त ने विद्युत संचरण परियोजनाओं (पावर ट्रांसमिशन), पेयजलापूर्ति पाइपलाइन, सड़क निर्माण, तथा पुल-पुलिया सहित अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़ी महत्वपूर्ण विकास योजनाओं के उन मामलों की गहन जांच की, जो वनाधिकार अधिनियम (FRA), अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) अथवा वन विभाग की अन्य आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण अटके हुए हैं। उपायुक्त रवि आनंद ने बैठक में मौजूद विभिन्न विभागों के कार्यपालक अभियंताओं से योजनावार जमीनी प्रगति की जानकारी प्राप्त की और सभी लंबित फाइलों के त्वरित निष्पादन हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।

ग्राम सभा का आयोजन कर वनाधिकार समिति से प्रस्ताव पास कराने का निर्देश

​बैठक में उपायुक्त ने सख्त निर्देश दिया कि जिन विकास योजनाओं के धरातल पर क्रियान्वयन हेतु नियमानुसार ग्राम सभा का आयोजन आवश्यक है, उन मामलों में बिना किसी देरी के ग्राम सभा बुलाई जाए। ग्राम सभा से पारित प्रस्तावों को सबसे पहले अनुमंडल स्तरीय वनाधिकार समिति से अनुमोदित कराया जाए और तत्पश्चात जिला स्तरीय वनाधिकार समिति से अंतिम स्वीकृति प्राप्त करने की प्रक्रिया समय सीमा के भीतर सुनिश्चित की जाए। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि सभी संबंधित विभाग आपसी तालमेल और समन्वय स्थापित करते हुए सभी आवश्यक कागजी व विधिक प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूर्ण करें, ताकि जनहित से जुड़ी इन विकास योजनाओं को शीघ्र धरातल पर उतारा जा सके और आम जनता को इसका लाभ समय पर मिल सके।

​उपायुक्त ने सभी संबंधित जिला स्तरीय पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे लंबित मामलों का नियमित रूप से अनुश्रवण (मॉनिटरिंग) करें और विभागीय समन्वय के माध्यम से उत्पन्न होने वाली किसी भी प्रकार की बाधा का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करें।

बैठक में कई वरीय प्रशासनिक और वन अधिकारी रहे मौजूद

​इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक समीक्षा बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे:

  • ​राहुल मीणा (वन प्रमंडल पदाधिकारी, उत्तरी चतरा प्रमंडल)
  • ​मुकेश कुमार (वन प्रमंडल पदाधिकारी, दक्षिणी चतरा प्रमंडल)
  • ​अरविंद कुमार (अपर समाहर्ता, चतरा)
  • ​जहूर आलम (अनुमंडल पदाधिकारी, चतरा)
  • ​विभिन्न कार्यपालक अभियंता एवं संबंधित तकनीकी विभागों के कर्मचारी।

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड ( विधिक व प्रशासनिक ज्ञान / Forest Clearance Framework)

​📌 जानिए क्या है वनाधिकार अधिनियम (FRA) और विकास योजनाओं में इसकी भूमिका?

  • अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वनाधिकार मान्यता) अधिनियम, 2006: इस कानून के तहत वन भूमि पर बुनियादी ढांचागत विकास (जैसे स्कूल, अस्पताल, सड़क, बिजली, पानी की पाइपलाइन) के लिए डायवर्जन हेतु स्थानीय ग्राम सभा की लिखित सहमति और अनापत्ति अनिवार्य है। इसके बिना कोई भी गैर-वानिकी कार्य वन क्षेत्र में नहीं हो सकता।
  • त्रि-स्तरीय वन समिति ढांचा: एफआरए के तहत किसी भी सरकारी योजना को पास करने के लिए प्रस्ताव पहले 'ग्राम सभा' से 'अनुमंडल स्तरीय वनाधिकार समिति' (SDLC) जाता है, और वहां से अंतिम मोहर के लिए 'जिला स्तरीय वनाधिकार समिति' (DLC) के पास पहुंचता है, जिसकी अध्यक्षता स्वयं उपायुक्त करते हैं।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: वन विभाग और कार्यदायी संस्थाओं में तालमेल ही चतरा के विकास की कुंजी (Editorial)

एनओसी की फाइलों में दबे जनहित के प्रोजेक्ट्स: समयबद्ध जवाबदेही से ही बदलेगी चतरा की सूरत

चतरा जिला भौगोलिक रूप से घने जंगलों से घिरा हुआ है, जहाँ विकास की कोई भी किरण (चाहे वह पानी की पाइपलाइन हो या बिजली के खंभे) वन विभाग के क्लियरेंस के बिना आगे नहीं बढ़ सकती। उपायुक्त रवि आनंद द्वारा बुलाई गई यह समीक्षा बैठक बेहद सामयिक है, क्योंकि अक्सर वन विभाग और लोक निर्माण या विद्युत विभाग के बीच समन्वय की कमी से फाइलें महीनों लटकी रहती हैं। सरकार की नीतियां कितनी भी अच्छी हों, लेकिन जब तक अनुमंडल और जिला स्तर की वनाधिकार समितियां डेडलाइन तय करके काम नहीं करेंगी, तब तक ग्रामीण जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसती रहेगी। अधिकारियों को कागजी पत्राचार के जाल से बाहर निकलकर ऑन-फील्ड जॉइंट सर्वे पर ध्यान देना होगा, तभी चतरा विकास की मुख्यधारा से तेज गति से जुड़ पाएगा।

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हजारीबाग जिला प्रशासन की अनूठी पहल: 'पुस्तक दान, ज्ञान का सम्मान' अभियान शुरू, आपकी अनुपयोगी किताबें संवारेंगी किसी का उज्जवल भविष्यकार्यशाला संपन्न: जे.गुरुजी ऐप और रेल प्रोजेक्ट के जरिए बदलेगा शिक्षण का तरीका

 

हजारीबाग जिला प्रशासन की अनूठी पहल: 'पुस्तक दान, ज्ञान का सम्मान' अभियान शुरू, आपकी अनुपयोगी किताबें संवारेंगी किसी का उज्जवल भविष्य

"प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए डीसी की विशेष अपील; नए समाहरणालय भवन के कमरा संख्या A-206 में जमा होंगी पुस्तकें"— न्यूज़ प्रहरी विशेष

प्रशासनिक ब्यूरो, हजारीबाग

  • रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): जिला जनसंपर्क कार्यालय (PRD), हजारीबाग (दिनांक: 10 जून 2026)

हजारीबाग:

शिक्षा और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े विद्यार्थियों के सपनों को नई उड़ान देने के लिए हजारीबाग जिला प्रशासन ने एक अत्यंत अनुकरणीय और मानवीय पहल की शुरुआत की है। हजारीबाग जिला प्रशासन द्वारा आधिकारिक तौर पर "पुस्तक दान, ज्ञान का सम्मान" अभियान का शंखनाद किया गया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सक्षम नागरिकों, सफल छात्रों और प्रबुद्ध समाज के घरों में रखी ऐसी प्रतियोगी किताबों को स्वेच्छा से दान कराना है, जो उनके उपयोग में नहीं हैं। प्रशासन इन किताबों को सहेजकर उन मेधावी और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों तक पहुंचाएगा, जो पैसों के अभाव में महंगी पुस्तकें खरीदने में असमर्थ हैं।

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"ज्ञान बांटिए, अवसर बढ़ाइए" – एक पुस्तक बदल सकती है किसी का भविष्य

​शेयर किए गए आधिकारिक पोस्टर के अनुसार, जिला प्रशासन हजारीबाग ने आम जनता और युवाओं से अपील करते हुए कहा है कि:

​"आपकी अनुपयोगी पुस्तकें, किसी का उज्जवल भविष्य बन सकती हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की उपयोगी पुस्तकों का दान करें और जरूरतमंद विद्यार्थियों के सपनों को नई उड़ान दें। आपके द्वारा दान दी गई पुस्तकें हजारीबाग जिले के विभिन्न पुस्तकालयों (Libraries) एवं अध्ययन केंद्रों में उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा।"

इन प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकें की जा सकती हैं दान

​अगर आपके पास या आपके परिचितों के पास निम्नलिखित प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित NCERT, सामान्य अध्ययन, भारतीय राजव्यवस्था (Indian Polity), अर्थशास्त्र, गणित, भौतिकी, पर्यावरण या समसामयिकी (Current Affairs) की किताबें उपलब्ध हैं, तो आप उन्हें इस महाभियान में दान कर सकते हैं:

  • सिविल सेवा: UPSC और JPSC
  • तकनीकी व चिकित्सा: JEE और NEET
  • बैंकिंग व रेलवे: Banking और Railway
  • कर्मचारी चयन व शिक्षक पात्रता: SSC, JTET, CTET और CUET
  • ​एवं अन्य तमाम प्रकार की प्रतियोगी परीक्षाओं की उपयोगी पुस्तकें।

📍 पुस्तक जमा करने का स्थान और समय नोट करें

​हजारीबाग जिला प्रशासन ने पुस्तकों के संग्रहण के लिए समाहरणालय में एक समर्पित केंद्र बनाया है, जहां कोई भी नागरिक अपनी पुस्तकें सुरक्षित जमा करा सकता है:

  • स्थान (Venue): जिला योजना कार्यालय, कमरा संख्या A-206, द्वितीय तल्ला (Second Floor), नया समाहरणालय भवन, हजारीबाग।
  • कार्यालय समय (Office Time): सुबह 10:30 AM से शाम 05:00 PM तक (कार्य दिवसों में)।

जनहित में जारी अपील: हजारीबाग जिला प्रशासन समस्त जिलावासियों, कोचिंग संस्थानों, और प्रबुद्ध नागरिकों से पुरजोर अपील करता है कि आप सभी इस पुनीत शिक्षा अभियान में बढ़-चढ़ कर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड ( विधिक व सामाजिक ज्ञान / Campaign Insights)

​📌 जानिए क्यों हजारीबाग के लिए गेम-चेंजर साबित होगा यह पुस्तक दान अभियान?

  • डिजिटल लाइब्रेरी नेटवर्क से जुड़ाव: हजारीबाग जिला प्रशासन पिछले कुछ समय से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पुस्तकालय क्रांति चला रहा है। इस अभियान से एकत्रित पुस्तकें सुदूर प्रखंडों की लाइब्रेरी तक पहुंचेंगी, जिससे सुदूर गांवों के युवाओं को भी UPSC-JPSC का स्टडी मटेरियल घर के पास मिल सकेगा।
  • रीसाइक्लिंग और पर्यावरण संरक्षण: पुरानी किताबों को कबाड़ में फेंकने या बेचने के बजाय दोबारा उपयोग में लाना रीसाइक्लिंग और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देता है। एक पुरानी किताब किसी नए छात्र के लिए पूर्णतः नई मार्गदर्शिका बन जाती है।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: किताबों की अलमारियों से निकलकर युवाओं के हाथों तक पहुंचे ज्ञान (Editorial)

कबाड़ में जाने वाली किताबें जब पुस्तकालयों की शान बनेंगी, तभी हजारीबाग का हर तबका 'आईएएस-आईपीएस' बनने का सपना देख सकेगा

हजारीबाग हमेशा से झारखंड का 'एजुकेशन हब' रहा है, लेकिन आज भी यहां सैकड़ों ऐसे छात्र हैं जो सिर्फ इसलिए प्रतियोगिता की दौड़ में पिछड़ जाते हैं क्योंकि वे चार से पांच हजार रुपये के बुक-सेट्स नहीं खरीद पाते। जिला प्रशासन की यह पहल सीधे तौर पर समाज के दो वर्गों को आपस में जोड़ती है—एक वो जो सफल हो चुके हैं और जिनकी किताबें अलमारियों में धूल फांक रही हैं, और दूसरे वो जो संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं। 'न्यूज प्रहरी' प्रशासन के इस कदम की भूरि-भूरि सराहना करता है। हमारा मानना है कि शहर के बड़े स्कूलों और कोचिंग संस्थानों को भी अपने स्तर पर 'बुक ड्रॉप बॉक्स' लगाना चाहिए, ताकि छात्र आसानी से इस अभियान का हिस्सा बन सकें।

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जीएम इंटर महाविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न: जे.गुरुजी ऐप और रेल प्रोजेक्ट के जरिए बदलेगा शिक्षण का तरीका

 

जीएम इंटर महाविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न: जे.गुरुजी ऐप और रेल प्रोजेक्ट के जरिए बदलेगा शिक्षण का तरीका

"प्रशिक्षक डॉ. पुरुषोत्तम कुमार सिंह और गगन कुमार ने डिजिटल टूल्स, ई-विद्यावाहिनी और वोकेशनल कोर्सेज पर दिया विशेष प्रशिक्षण; प्राचार्य शंभू कुमार ने जताया आभार"— न्यूज़ प्रहरी विशेष

शिक्षा संवाददाता, हजारीबाग

  • रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): मीडिया प्रभारी, जीएम इंटर महाविद्यालय (दिनांक: 10 जून 2026)

हजारीबाग:

हजारीबाग के प्रतिष्ठित जीएम इंटर महाविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के सफल क्रियान्वयन को लेकर आयोजित दो दिवसीय सघन प्रशिक्षण शिविर का शानदार समापन हो गया। इस विशेष कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को आधुनिक और डिजिटल शिक्षण पद्धतियों से अवगत कराना था, ताकि क्लासरूम के भीतर बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और वैश्विक स्तर की शिक्षा प्रदान की जा सके। इस दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य शंभू कुमार समेत कॉलेज के समस्त शिक्षक और शिक्षिकाएं मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

🏫 एजुकेशन अपडेट: हजारीबाग के जीएम इंटर कॉलेज में दो दिवसीय एनईपी 2020 शिक्षक कार्यशाला संपन्न; सीखे डिजिटल टूल्स।

NEP 2020 और 'जे.गुरुजी ऐप' के हर पहलू पर विस्तार से चर्चा

​कार्यशाला के दौरान मुख्य प्रशिक्षकों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत स्कूली और इंटर स्तरीय शिक्षा में आए क्रांतिकारी बदलावों के प्रत्येक पहलू पर विस्तार से जानकारी दी। इसके साथ ही, झारखंड सरकार और शिक्षा विभाग के डिजिटल प्लेटफॉर्म 'जे.गुरुजी ऐप' (J.Guruji App) की बारीकियों को समझाया गया। शिक्षकों को ऐप के अंतर्गत संचालित होने वाले महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स की ट्रेनिंग दी गई, जिसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • रेल प्रोजेक्ट (Project RAIL): बच्चों के नियमित मूल्यांकन और लर्निग आउटकम को सुधारने की तकनीक।
  • ई-विद्यावाहिनी (E-Vidyavahini): शिक्षकों और छात्रों की डिजिटल उपस्थिति तथा डेटा प्रबंधन।
  • उल्लास (ULLAS Initiative): नव-साक्षरों और सार्वजनिक शिक्षा के तहत जीवन कौशल सिखाने की पद्धति।
  • वोकेशनल कोर्सेज (Vocational Courses): बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ हुनरमंद और रोजगारपरक बनाने के तरीके।
  • डिजिटल टीचर नोट्स (Teacher Notes): क्लासरूम में जाने से पहले आधुनिक और प्रभावी पाठ योजना तैयार करना।

शिक्षकों के लिए 'मील का पत्थर' साबित होगी यह कार्यशाला

​प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए मुख्य वक्ता और प्रशिक्षक के रूप में उपस्थित डॉ. पुरुषोत्तम कुमार सिंह एवं गगन कुमार ने क्लासरूम मैनेजमेंट से लेकर महाविद्यालय प्रबंधन तक के सफर पर प्रकाश डाला। दोनों विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि आधुनिक युग में बच्चों के सर्वांगीण (सार्वजनिक) विकास के लिए पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ डिजिटल टूल्स का समावेश बेहद जरूरी है।

​महाविद्यालय प्रबंधन के अनुसार, जीएम इंटर महाविद्यालय के शिक्षकों के लिए यह कार्यशाला एक मील का पत्थर साबित होगी। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों ने न केवल नई तकनीकों और सरकारी पोर्टल्स को चलाना सीखा, बल्कि इस बात का संकल्प भी लिया कि वे इस दो दिवसीय ज्ञान का शत-प्रतिशत उपयोग अपने दैनिक शिक्षण कक्ष (क्लासरूम) में करेंगे।

धन्यवाद ज्ञापन के साथ समापन

​कार्यशाला के अंतिम सत्र में शिक्षकों के प्रदर्शन और उनके उत्साह की सराहना की गई। इसके बाद, जीएम इंटर महाविद्यालय के प्राचार्य शंभू कुमार ने दोनों प्रशिक्षकों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया और अपने धन्यवाद ज्ञापन के साथ इस दो दिवसीय ऐतिहासिक प्रशिक्षण शिविर के समापन की आधिकारिक घोषणा की।

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड ( विधिक व तकनीकी ज्ञान / Educational Tools Knowledge)

​📌 जानिए क्या हैं जे.गुरुजी ऐप, ई-विद्यावाहिनी और रेल प्रोजेक्ट?

  • जे.गुरुजी (J.Guruji) मोबाइल ऐप: झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) द्वारा विकसित एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जहां कक्षा 1 से 12वीं तक के छात्रों के लिए ई-बुक्स, वीडियो लेक्चर्स, क्विज़ और शिक्षकों के लिए पाठ्य सामग्रियां उपलब्ध हैं।
  • प्रोजेक्ट रेल (Regular Assessment for Improved Learning - RAIL): यह शिक्षा की गुणवत्ता को मापने का एक राज्यव्यापी पैमाना है, जिसके तहत विद्यालयों में हर सप्ताह या निश्चित अंतराल पर वस्तुनिष्ठ परीक्षाएं ली जाती हैं, ताकि यह पता चल सके कि बच्चे क्लास में क्या सीख रहे हैं।
  • ई-विद्यावाहिनी पोर्टल: यह झारखंड सरकार का एक सेंट्रलाइज्ड स्कूल मॉनिटरिंग सिस्टम है, जो बायोमेट्रिक अटेंडेंस, स्कूल फंड ट्रैकिंग और छात्रवृत्ति के डेटा को पूरी पारदर्शिता के साथ प्रबंधित करता है।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: डिजिटल युग में शिक्षकों का अपग्रेड होना वक्त की मांग (Editorial)

सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं, शिक्षकों का मानसिक अपग्रेडेशन ही बदलेगा शिक्षा का स्तर: जीएम इंटर कॉलेज की पहल सराहनीय

अक्सर देखा जाता है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP) की बातें कागजों और बड़े सेमिनारों तक सीमित रह जाती हैं, लेकिन हजारीबाग के जीएम इंटर महाविद्यालय ने अपने शिक्षकों को सीधे जमीन पर उतारकर ट्रेनिंग दी है, जो जिला शिक्षा जगत के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है। 'जे.गुरुजी ऐप' और 'ई-विद्यावाहिनी' जैसे टूल्स आज के समय में अनिवार्य हो चुके हैं। लेकिन असली चुनौती यह है कि क्या सरकारी और एडेड कॉलेजों के शिक्षक इस तकनीकी बदलाव को खुले दिल से अपना पाते हैं या नहीं। डॉ. पुरुषोत्तम कुमार सिंह और गगन कुमार जैसे प्रशिक्षकों की यह पहल तभी सफल मानी जाएगी, जब क्लासरूम के भीतर छात्र सचमुच 'प्रोजेक्ट रेल' और वोकेशनल कोर्सेज का लाभ उठा सकेंगे। कॉलेज के प्राचार्य शंभू कुमार इस दूरदर्शी आयोजन के लिए बधाई के पात्र हैं।

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हजारीबाग उत्पाद विभाग की बड़ी कार्रवाई: पदमा के दौरवा में मुर्गी फार्म की आड़ में चल रही मिनी शराब फैक्ट्री का भंडाफोड़, भारी मात्रा में अवैध विदेशी शराब और स्प्रिट जब्त

हजारीबाग उत्पाद विभाग की बड़ी कार्रवाई: पदमा के दौरवा में मुर्गी फार्म की आड़ में चल रही मिनी शराब फैक्ट्री का भंडाफोड़, भारी मात्रा में अवैध विदेशी शराब और स्प्रिट जब्त

"उपायुक्त के निर्देश पर सुबह 5:30 बजे हुई सघन छापेमारी; भारी मात्रा में नामी ब्रांड के रैपर, नकली होलोग्राम, ढक्कन और पंचिंग मशीन बरामद, मुख्य आरोपी अशोक बाड़ा समेत अन्य पर केस दर्ज"— उत्पाद टीम

विशेष संवाददाता, हजारीबाग

  • रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): सहायक आयुक्त उत्पाद कार्यालय, हजारीबाग (दिनांक: 10 जून 2026)

हजारीबाग:

हजारीबाग जिले में अवैध शराब के निर्माण, संचय, परिवहन और बिक्री के खिलाफ जिला प्रशासन ने एक बार फिर कड़ा प्रहार किया है। उपायुक्त (डीसी) हजारीबाग के द्वारा जिले में अवैध शराब के कारोबार पर पूरी तरह अंकुश लगाने हेतु दिए गए सघन छापेमारी आदेश के आलोक में उत्पाद विभाग की टीम ने बुधवार तड़के एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। सहायक आयुक्त उत्पाद, हजारीबाग के निर्देशन तथा निरीक्षक उत्पाद के कुशल पर्यवेक्षण में उत्पाद विभाग की विशेष टीम ने पदमा थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम दौरवा में गुप्त सूचना के आधार पर तड़के सुबह 5:30 बजे अचानक धावा बोलकर एक अवैध मिनी शराब फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है।

"हजारीबाग के पदमा में मुर्गी फार्म की आड़ में छिपे शराब माफियाओं के काले साम्राज्य का उत्पाद विभाग ने तड़के सुबह भंडाफोड़ कर दिया है!"

मुर्गी फार्म की आड़ में तैयार हो रहा था मौत का सामान

​शराब माफियाओं ने हजारीबाग पुलिस और उत्पाद विभाग की आंखों में धूल झोंकने के लिए पदमा के दौरवा ग्राम में स्थित एक मुर्गी फार्म (पोल्ट्री फार्म) को अपना सुरक्षित ठिकाना बनाया था। इस मुर्गी फार्म के भीतर बकायदा एक मिनी फैक्ट्री संचालित की जा रही थी, जहां विभिन्न नामी ब्रांडों की हूबहू दिखने वाली अवैध नकली विदेशी शराब तैयार की जा रही थी। सुबह-सुबह हुई इस आकस्मिक छापेमारी से इलाके के शराब माफियाओं में हड़कंप मच गया है।

भारी मात्रा में स्पिरिट, केमिकल और पैकिंग सामग्रियां बरामद

​फैक्ट्री के भीतर से उत्पाद विभाग की टीम ने विभिन्न ब्रांड के अवैध विदेशी शराब और उसे बनाने से लेकर पैक करने तक का सारा कच्चा सामान और मशीनें जब्त की हैं। बरामद सामानों की सूची निम्नलिखित है:

  • तैयार अवैध विदेशी शराब: करीब 180.00 लीटर
  • स्पिरिट (कच्चा माल): 105.00 लीटर
  • अन्य सामग्रियां: भारी मात्रा में विभिन्न ब्रांडों के लेबल (रैपर), नकली होलोग्राम, ढक्कन, कार्टन, तैयार रंगीन शराब, कैरामेल (रंग देने वाला केमिकल), पंचिंग मशीन तथा पैकिंग के लिए रखी गईं सैकड़ों खाली बोतलें।

दौरवा निवासी अशोक बाड़ा पर सुसंगत धाराओं के तहत केस दर्ज

​उत्पाद विभाग ने इस अवैध कारोबार के मुख्य सरगना और दौरवा ग्राम के स्थानीय निवासी अशोक बाड़ा समेत इस रैकेट में संलिप्त अन्य अपराधियों की पहचान कर ली है। उत्पाद विभाग द्वारा झारखंड उत्पाद अधिनियम की सुसंगत और कड़े कानूनी प्रावधानों वाली धाराओं के तहत इन सभी नामजद और अज्ञात अभियुक्तों के खिलाफ मामला दर्ज कर विधिक अभियोग चलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

सफल छापेमारी दल में शामिल उत्पाद अधिकारी

​अंधेरे का लाभ उठाकर शराब माफियाओं को दबोचने और इस मिनी फैक्ट्री को ध्वस्त करने वाली जांबाज उत्पाद टीम में मुख्य रूप से निम्नलिखित अधिकारी व जवान शामिल थे:

  1. ​सौरव कुमार झा (निरीक्षक उत्पाद)
  2. ​सुमितेश कुमार (अवर निरीक्षक उत्पाद)
  3. ​सय्यद बसीरुद्दीन (सहायक अवर निरीक्षक)
  4. ​सशस्त्र गृह रक्षा वाहिनी (होमगार्ड) के जवान

​सहायक आयुक्त उत्पाद कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध शराब के सिंडिकेट को पूरी तरह ध्वस्त करने तक यह सघन चेकिंग और छापेमारी अभियान लगातार जारी रहेगा।

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड ( विधिक ज्ञान / Excise Act Knowledge)

​📌 जानिए क्या है झारखंड उत्पाद अधिनियम और नकली होलोग्राम का विधिक अपराध?

  • झारखंड उत्पाद अधिनियम, 1915 (संशोधित): इसके तहत बिना लाइसेंस के स्प्रिट का संचय करना, विदेशी शराब का निर्माण करना और गैर-कानूनी रूप से उसका परिवहन करना गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आता है। इसमें शामिल दोषियों को भारी जुर्माने के साथ-साथ कठोर कारावास की सजा का प्रावधान है।
  • नकली होलोग्राम और रैपर का विधिक संकट: सरकारी राजस्व को चूना लगाने के लिए नकली सरकारी होलोग्राम का उपयोग करना 'IPC की धारा 467, 468 और 471' के तहत जालसाजी, धोखाधड़ी और सरकारी दस्तावेजों के कूटकरण (Forgery) का गंभीर मामला बनता है।
  • कैरामेल और स्प्रिट का स्वास्थ्य पर असर: मिनी फैक्ट्रियों में शराब का रंग और गाढ़ापन बदलने के लिए बिना किसी वैज्ञानिक माप के कैरामेल और स्प्रिट मिलाई जाती है। यह मिश्रण अत्यधिक जहरीला (Toxic) हो सकता है, जिससे लोगों की जान जाने या आंखों की रोशनी जाने का खतरा रहता है।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: मुर्गी फार्मों की आड़ में पनपता मौत का नेटवर्क (Editorial)

ब्रांडेड बोतलों में नकली शराब का खेल: उत्पाद विभाग की मुस्तैदी सराहनीय, पर ग्रामीण इलाकों में सघन सर्वे की जरूरत

पदमा के दौरवा में मुर्गी फार्म के भीतर अवैध विदेशी शराब बनाने की मिनी फैक्ट्री का मिलना यह साबित करता है कि हजारीबाग के सुदूर ग्रामीण और सुनसान इलाकों में शराब माफिया कितनी चालाकी से अपना जाल फैला चुके हैं। तड़के सुबह 5:30 बजे छापेमारी कर सौरव कुमार झा और सुमितेश कुमार की टीम ने निश्चित रूप से एक बड़ी त्रासदी को टाल दिया है, क्योंकि ऐसी नकली शराबें अक्सर जानलेवा साबित होती हैं। लेकिन 'न्यूज प्रहरी' का मानना है कि केवल उत्पाद विभाग की छापेमारी काफी नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे पोल्ट्री फार्म, बंद पड़े गोदामों और ईंट-भट्टों का स्थानीय चौकिदारों और बीट पुलिस के जरिए औचक निरीक्षण होना बेहद जरूरी है, ताकि अशोक बाड़ा जैसे अपराधी ग्रामीण युवाओं के भविष्य और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ न कर सकें।

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झारखंड सरकार ने प्रवासी श्रमिकों के लिए लागू की विशेष सुरक्षा और आर्थिक सहायता योजनाएं: विदेशों और अन्य राज्यों में कार्यरत मजदूरों को पंजीकरण कराने की अपील



Hazaribagh: की बरही पुलिस का बड़ा धमाका: विक्की कुमार सोनी हत्याकांड का महज़ 48 घंटे में सफल उद्भेदन, बिहार के दो शातिर शूटर गिरफ्तार

Hazaribagh: की बरही पुलिस का बड़ा धमाका: विक्की कुमार सोनी हत्याकांड का महज़ 48 घंटे में सफल उद्भेदन, बिहार के दो शातिर शूटर गिरफ्तार

"कोडरमा जाने के दौरान करसो पुल के पास की गई थी गोली मारकर हत्या; लूटी गई कार, मोबाइल और अपराधियों का पुराना खूंखार आपराधिक इतिहास आया सामने"— एसपी

क्राइम रिपोर्टर, हजारीबाग

  • रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): पुलिस अधीक्षक का कार्यालय, हजारीबाग (प्रेस-विज्ञप्ति, दिनांक: 10 जून 2026)

हजारीबाग:

हजारीबाग जिले के बरही थाना क्षेत्र के अंतर्गत पिछले दिनों हुई सनसनीखेज हत्या की घटना का पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सफल उद्भेदन कर दिया है। पुलिस ने इस जघन्य हत्याकांड में संलिप्त बिहार के रहने वाले दो कुख्यात अपराधियों को दबोचने में सफलता पाई है। गिरफ्तार अपराधियों ने न केवल विक्की कुमार सोनी की हत्या में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है, बल्कि हजारीबाग समेत अन्य जिलों में पूर्व में अंजाम दी गई कई बड़ी लूट और चोरी की वारदातों में भी अपनी संलिप्तता कबूल की है।
 ब्रेकिंग क्राइम न्यूज़: हजारीबाग के बरही में विक्की कुमार सोनी हत्याकांड का पुलिस ने किया सफल उद्भेदन; बिहार के दो पेशेवर अपराधी धरे गए।

क्या था पूरा मामला और कैसे हुई वारदात?

​हजारीबाग पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक विवरण के अनुसार, 8 जून 2026 को हजारीबाग के ओकनी (थाना- लोहसिंघना) के रहने वाले विक्की कुमार सोनी (पिता- स्वर्गीय देवनंदन प्रसाद) अपने एक दोस्त के साथ कार से कोडरमा जा रहे थे। इसी दौरान बरही थाना क्षेत्र के अंतर्गत करसो पुल के समीप अज्ञात हथियारबंद अपराधियों ने उनकी गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी थी। इस दुस्साहसिक वारदात के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी।

एसपी के निर्देश पर SIT का गठन और त्वरित कार्रवाई

​हत्याकांड की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक, हजारीबाग ने मामले के त्वरित खुलासे और अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। एसआईटी ने आधुनिक तकनीकी विंग (Technical Cell) की मदद से घटना का सूक्ष्मता से विश्लेषण किया। वैज्ञानिक साक्ष्यों और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर टीम ने त्वरित छापेमारी करते हुए हत्या में सीधे तौर पर संलिप्त दो शातिर अपराधियों को दबोच लिया।

बिहार के रहने वाले हैं दोनों गिरफ्तार शूटर

​पुलिस की गिरफ्त में आए दोनों अपराधियों की पहचान बिहार के शातिर गिरोहों से जुड़ी है:

  1. विक्रम कुमार (उम्र 25 वर्ष): पिता- विजय साव, ग्राम व थाना- नारदीगंज, जिला- नवादा, बिहार।
  2. दिलीप कुमार (उम्र 25 वर्ष): पिता- केसर चौधरी, ग्राम- चंदा खुर्द, थाना- वजीरगंज, जिला- गया, बिहार।

​पूछताछ के दौरान दोनों ही अभियुक्तों ने विक्की कुमार सोनी की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली है। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल किए गए दोनों अभियुक्तों के पास से 2 मोबाइल फोन और मृतक जिस हुंडई कंपनी की ग्रे रंग की कार (संख्या- JH02AE-0232) से यात्रा कर रहे थे, उसे भी अपराधियों के पास से विधिवत जब्त कर लिया है।

गिरफ्तार अपराधियों का खूंखार आपराधिक इतिहास

​पुलिस रिकॉर्ड (फाइल 227682.jpg) के अनुसार, गिरफ्तार अभियुक्तों का पुराना और बेहद गंभीर आपराधिक इतिहास रहा है। ये दोनों बिहार और झारखंड के कई जिलों में चोरी, लूट, ड्रग्स तस्करी और आर्म्स एक्ट जैसे मामलों में वांछित रहे हैं:

  • दिलीप कुमार के विरुद्ध दर्ज मामले:
    1. वजीरगंज थाना कांड सं- 412/21 (दिनांक 12.09.21): बिहार उत्पाद प्रतिषेध अधिनियम की धारा- 30(a) के तहत मामला दर्ज।
    2. वजीरगंज थाना कांड सं- 350/23 (दिनांक 12.06.23): भारतीय दंड विधान (भा०द०वि०) की धारा- 341, 324, 326, 307, 34 एवं 27 आर्म्स एक्ट (जानलेवा हमला और अवैध हथियार रखने) के तहत दर्ज मामला।
  • विक्रम कुमार के विरुद्ध दर्ज मामले:
    1. नारदीगंज थाना कांड सं- 85/23 (दिनांक 05.03.23): भा०द०वि० की धारा- 341, 323, 324, 325, 504, 34 के तहत मामला दर्ज।
    2. नारदीगंज थाना कांड सं- 199/23 (दिनांक 03.06.23): भा०द०वि० की धारा- 147, 148, 341, 323, 324, 325, 307, 504, 506 के तहत दंगा भड़काने, घातक हथियारों से लैस होने और जानलेवा हमले का मामला दर्ज।

सफल छापेमारी दल में शामिल पुलिस अधिकारी

​इस अत्यंत संवेदनशील कांड का महज़ दो दिनों के भीतर पर्दाफाश करने वाली पुलिस टीम में मुख्य रूप से निम्नलिखित जांबाज अधिकारी शामिल थे:

  1.  राधाप्रेम किशोर (अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, बरही)
  2. ​विनोद कुमार (पु०नि० सह थाना प्रभारी, बरही थाना)
  3. ​शमशेर बहादुर सिंह (पु०अ०नि०, बरही थाना)
  4. ​राजबल्लभ यादव (पु०अ०नि०, बरही थाना)
  5. ​राजेश भोक्ता (पु०अ०नि०, बरही थाना) एवं बरही थाना सशस्त्र गार्ड
  6. ​तकनीकी शाखा की पूरी टीम, हजारीबाग

​हजारीबाग पुलिस फिलहाल इन अपराधियों से रिमांड पर आगे की पूछताछ कर रही है ताकि इनके अंतर-राज्यीय गिरोह के अन्य सदस्यों और झारखंड में फैले इनके नेटवर्क का पूरी तरह से सफाया किया जा सके।

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झारखंड सरकार ने प्रवासी श्रमिकों के लिए लागू की विशेष सुरक्षा और आर्थिक सहायता योजनाएं: विदेशों और अन्य राज्यों में कार्यरत मजदूरों को पंजीकरण कराने की अपील

झारखंड सरकार ने प्रवासी श्रमिकों के लिए लागू की विशेष सुरक्षा और आर्थिक सहायता योजनाएं: विदेशों और अन्य राज्यों में कार्यरत मजदूरों को पंजीकरण कराने की अपील

"ठेकेदारों के माध्यम से जाने वाले श्रमिकों को पहले दिन से मिलेगी मजदूरी और विस्थापन भत्ता; दुर्घटना में मृत्यु पर पांच लाख रुपये तक की मिलेगी एकमुश्त सहायता राशि"— श्रम विभाग

विशेष संवाददाता, हजारीबाग

  • रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): जिला सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय (PRD), समाहरणालय भवन, हजारीबाग

हजारीबाग:

झारखंड सरकार के श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग द्वारा राज्य के प्रवासी श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा, उनके आर्थिक कल्याण और सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसी सिलसिले में हजारीबाग जिला सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय द्वारा प्रेस विज्ञप्ति संख्या 359/09.06.2026 जारी कर दूसरे राज्यों अथवा विदेशों में रोजगार के लिए जाने वाले सभी श्रमिकों से अनिवार्य रूप से सरकारी पोर्टल पर पंजीकरण कराने की अपील की गई है, ताकि किसी भी विपरीत परिस्थिति या आपातकाल में उन्हें राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ समय पर सीधे मिल सके।

 पंजीकरण कराने के बड़े फायदे:
• ठेकेदारों द्वारा पहले दिन से मजदूरी और विस्थापन भत्ता।
• देश में दुर्घटना मृत्यु पर आश्रितों को ₹2 लाख की मदद।
• विदेशों में असामयिक मृत्यु पर परिजनों को ₹5 लाख की एकमुश्त राशि।

विस्थापन भत्ता और पहले दिन से मजदूरी भुगतान का विधिक प्रावधान

​विभाग द्वारा जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि कोई श्रमिक किसी ठेकेदार, संवेदक या कतिपय प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से दूसरे राज्य में काम करने के लिए जाता है, तो उसे कार्यस्थल पर पहुंचने और कार्य पर जाने के पहले दिन से ही नियमानुसार मजदूरी देय होगी। इसके साथ ही, प्रवासी मजदूरों को नए स्थान पर स्थापित होने के लिए विस्थापन भत्ता के रूप में उनके आधे महीने की मजदूरी के बराबर की नकद राशि संबंधित संवेदक या एजेंसी द्वारा अनिवार्य रूप से प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, श्रमिकों के आने-जाने का पूरा यात्रा किराया और यात्रा अवधि के दौरान की मजदूरी का भुगतान भी नियमानुसार सुनिश्चित करने का कड़ा निर्देश जारी किया गया है।

श्रमाधान पोर्टल और ऐप पर पंजीकरण की है बेहद सरल सुविधा

​अन्य राज्यों में रोजगार के लिए जाने वाले श्रमिकों की ट्रैकिंग और सुरक्षा के लिए सरकार ने डिजिटल माध्यमों को सशक्त किया है। श्रमिक स्वयं श्रमाधान पोर्टल (Shramadhan Portal), प्रवासी झारखंड ऐप (Pravasi Jharkhand App) अथवा अपने निकटतम प्रज्ञा केंद्र (सीएससी) के माध्यम से बेहद आसानी से अपना ऑनलाइन पंजीकरण करा सकते हैं। इस पंजीकरण के पूरा होने के बाद ही श्रमिकों को राज्य सरकार की विभिन्न सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ प्रदान किया जाता है।

दुर्घटना, आपदा या असमय मृत्यु पर आश्रितों को मिलेगी बड़ी आर्थिक सहायता

​पंजीकृत प्रवासी श्रमिकों के लिए सरकार ने संकट की घड़ी में आर्थिक संबल प्रदान करने के लिए विशेष कोष का गठन किया है:

  • दुर्घटना एवं पूर्ण अशक्तता सहायता: कार्य के दौरान किसी दुर्घटना में मृत्यु होने या स्थायी पूर्ण अशक्तता (अपंगता) की स्थिति में लाभुक श्रमिक के आश्रितों को दो लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा, दुर्घटना में अंग-भंग या अन्य शारीरिक क्षति होने पर भी निर्धारित नियमावली के तहत आर्थिक सहायता दी जाती है।
  • पार्थिव शरीर को गृह राज्य लाना: यदि किसी श्रमिक की दूसरे राज्य में दुर्घटना या प्राकृतिक आपदा के कारण असमय मृत्यु हो जाती है, तो उसके पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान के साथ उनके गृह राज्य और पैतृक गांव तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था और खर्च सरकार वहन करती है।
  • मुख्यमंत्री झारखंड प्रवासी श्रमिक दुर्घटना कोष: इस विशेष कोष के अंतर्गत, देश के किसी भी कोने में दुर्घटना या प्राकृतिक आपदा का शिकार होने वाले मृत या गंभीर रूप से घायल प्रवासी श्रमिकों को त्वरित सहायता देने और उन्हें घर वापस लाने के लिए अग्रिम सहायता राशि (एडवांस फंड) उपलब्ध कराने का सीधा प्रावधान है।
  • अंतरराष्ट्रीय प्रवासी श्रमिक अनुदान योजना: विदेश में जाकर रोजगार करने वाले झारखंड के श्रमिकों के लिए सरकार 'मुख्यमंत्री झारखंड अंतरराष्ट्रीय प्रवासी श्रमिक अनुदान योजना' संचालित कर रही है। इसके तहत यदि किसी श्रमिक की विदेश में असामयिक मृत्यु हो जाती है, तो उनके परिजनों और आश्रितों को संकट से उबारने के लिए पांच लाख रुपये की एकमुश्त सहायता राशि प्रदान की जाती है।

​श्रम विभाग ने राज्य के सभी कामकाजी भाई-बहनों से पुरजोर अपील की है कि वे आजीविका के लिए राज्य की सीमा से बाहर कदम रखने से पहले अपना सरकारी पंजीकरण अवश्य सुनिश्चित करें। किसी भी प्रकार की विस्तृत जानकारी, शिकायत या आपातकालीन सहायता के लिए श्रमिक जिला श्रम कार्यालय, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी के कार्यालय अथवा विभाग के टोल फ्री नंबर 18003456526 पर सीधे संपर्क स्थापित कर सकते हैं। इसके साथ ही, राज्य प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष (Control Room) के विभिन्न हेल्पलाइन नंबरों पर भी 24 घंटे सहायता प्राप्त की जा सकती है।

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड (Inter-State Migrant Workmen Act & Welfare Rules)

​📌 जानिए क्या है अंतरराज्यिक प्रवासी कर्मकार अधिनियम और आपके कानूनी अधिकार?

  • अंतरराज्यिक प्रवासी कर्मकार अधिनियम, 1979 (ISMW Act): यह एक केंद्रीय कानून है जो उन श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करता है जिन्हें एक राज्य से दूसरे राज्य में काम के लिए ले जाया जाता है। इस कानून के तहत 5 या अधिक प्रवासी श्रमिकों को नियोजित करने वाले हर ठेकेदार और नियोक्ता के लिए लाइसेंस लेना और सरकार के पास प्रत्येक मजदूर का पूरा ब्यौरा दर्ज कराना विधिक रूप से अनिवार्य है।
  • विस्थापन भत्ते का कानूनी आधार: अधिनियम की धारा 14 के अनुसार, प्रत्येक प्रवासी श्रमिक को रोजगार की कमान संभालने के समय ही संवेदक द्वारा विस्थापन भत्ता (Displacement Allowance) दिया जाना अनिवार्य है, जो न्यूनतम मजदूरी के 50% या उससे अधिक होता है। यह राशि गैर-वापसी योग्य (Non-Refundable) होती है, यानी इसे मजदूर के वेतन से काटा नहीं जा सकता।
  • समान कार्य के लिए समान वेतन: इस कानून के तहत प्रवासी श्रमिकों को उसी संस्थान या उद्योग में स्थानीय श्रमिकों के बराबर ही मजदूरी, कार्य के घंटे और सुविधाएं पाने का वैधानिक अधिकार है। चिकित्सा सुविधाएं, उपयुक्त आवास और कार्यस्थल पर लैंगिक सुरक्षा सुनिश्चित करना भी नियोक्ता की सीधी कानूनी जिम्मेदारी है।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: पलायन का दर्द और सरकारी योजनाओं के धरातल पर क्रियान्वयन की चुनौती (Editorial)

पंजीकरण की अपील सराहनीय, लेकिन सुदूर गांवों में जागरूकता और नियंत्रण कक्ष की सक्रियता सबसे बड़ी कसौटी

झारखंड जैसे श्रम-बहुल राज्य में प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर श्रम विभाग द्वारा जारी की गई यह नियमावली और योजनाएं कागजी तौर पर अत्यंत स्वागत योग्य और मानवीय दृष्टिकोण से परिपूर्ण हैं। विदेशों में मरने वाले श्रमिकों के परिजनों को 5 लाख रुपये और देश के भीतर हादसे का शिकार होने वालों को 2 लाख रुपये की सहायता देना सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। लेकिन 'न्यूज प्रहरी' का मानना है कि इन योजनाओं की वास्तविक सफलता केवल प्रेस विज्ञप्तियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका सीधा लाभ उन सुदूरवर्ती और ग्रामीण इलाकों के मजदूरों तक पहुंचना चाहिए जो अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे होने के कारण डिजिटल पंजीकरण की जटिलताओं से दूर हैं।

अक्सर देखा जाता है कि हजारीबाग, गिरिडीह और बोकारो जैसे जिलों से हजारों मजदूर बिना किसी पंजीकरण के दलालों के माध्यम से लेह, लद्दाख, चेन्नई या खाड़ी देशों में चले जाते हैं। जब वहां उनके साथ कोई हादसा होता है या बंधक बनाया जाता है, तब प्रशासन को उनकी सुध आती है। सरकार को चाहिए कि वह पंचायतों के माध्यम से मुखिया और रोजगार सेवकों को यह जिम्मेदारी सौंपे कि गांव से बाहर जाने वाले हर पैर का रिकॉर्ड पंचायत भवन में दर्ज हो। साथ ही, विभाग के टोल फ्री नंबर 18003456526 की कार्यप्रणाली को इतना दुरुस्त करना होगा कि सुदूर लेह की पहाड़ियों में फंसा हुआ कोई श्रमिक जब फोन करे, तो उसे तत्काल प्रशासनिक रेस्क्यू मिल सके। केवल तभी 'श्रमाधान' सचमुच में समाधान बन पाएगा।

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हजारीबाग उत्पाद विभाग की तड़के बड़ी कार्रवाई: सिंदूर चौक से कटकमदाग तक फिल्मी अंदाज में पीछा कर पकड़ी गई एर्टिगा कार, 55 कार्टन अवैध विदेशी शराब जब्त



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